इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति और विशेषकर इंदौर के सार्वजनिक जीवन के लिए आज का दिन एक बेहद दुखद खबर लेकर आया। कांग्रेस के कद्दावर नेता और इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 से तीन बार विधायक रहे अश्विन जोशी का आज, 8 मई 2026 की सुबह निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके आकस्मिक निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।


जानकारी के मुताबिक, अश्विन जोशी पिछले कई दिनों से बीमार थे और उनका उपचार चल रहा था। आज सुबह अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा, जिसके बाद परिजन उन्हें तुरंत इंदौर के शेल्बी हॉस्पिटल लेकर पहुँचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने सघन जांच की, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें बचाया नहीं जा सका और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की सूचना मिलते ही अस्पताल के बाहर समर्थकों और शुभचिंतकों का तांता लग गया।


छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर

अश्विन जोशी का राजनीतिक सफर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी और धीरे-धीरे इंदौर कांग्रेस की रीढ़ बन गए। वे पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता महेश जोशी के भतीजे थे, जिनसे उन्हें राजनीति के गुर विरासत में मिले थे। जोशी को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बेहद करीबी माना जाता था। उन्होंने साल 1998 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और भाजपा के गोपीकृष्ण नेमा को हराकर विधानसभा पहुँचे। इसके बाद उन्होंने 2003 और 2008 में भी जीत का परचम लहराकर हैट्रिक बनाई।


दिग्गज नेताओं ने दी विनम्र श्रद्धांजलि

अश्विन जोशी के निधन पर प्रदेश के राजनीतिक दिग्गजों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इंदौर और मध्य प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में उनका स्थान सदा विशेष रहेगा। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे एक 'हृदय विदारक' क्षति बताते हुए कहा कि वे इस दुख की घड़ी में संपूर्ण जोशी परिवार के साथ खड़े हैं। कई अन्य नेताओं ने भी उन्हें एक जुझारू और जमीनी नेता के रूप में याद किया है, जिन्होंने हमेशा अपने क्षेत्र की जनता की आवाज़ बुलंद की।


अश्विन जोशी केवल एक नेता नहीं, बल्कि इंदौर की गंगा-जमुनी तहजीब और जुझारू राजनीति के प्रतीक थे। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 की जनता के बीच उनकी गहरी पैठ थी। आज उनके निधन से न केवल कांग्रेस पार्टी को अपूर्णीय क्षति हुई है, बल्कि इंदौर ने अपना एक ऐसा 'पारिवारिक साथी' खो दिया है जो हर सुख-दुख में जनता के साथ खड़ा रहता था। उनके निधन पर आज कई स्थानीय नेताओं ने अपने व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए उन्हें याद किया।