भोपाल। मध्यप्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया पूरे परवान पर है। सरकार ने इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ पैदावार को देखते हुए किसानों की सहूलियत के लिए अपने खजाने और गोदामों के दरवाजे खोल दिए हैं। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक प्रदेश के 9 लाख 9 हजार किसानों से 53 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है, जिसके बदले किसानों के खातों में 9525.70 करोड़ रुपये की राशि पहुँचाई जा चुकी है। यह आंकड़े बताते हैं कि इस बार उपार्जन की रफ़्तार पिछले वर्षों के मुकाबले काफी तेज है।
रात 10 बजे तक होगी तुलाई, सर्वर की क्षमता भी बढ़ी
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों के हित में कई बड़े नीतिगत बदलावों की घोषणा की है। किसानों को उपार्जन केंद्रों पर लंबी कतारों से बचाने के लिए अब तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया गया है। वहीं, बिल (देयक) जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक बढ़ा दिया गया है। इतना ही नहीं, केंद्रों पर भीड़ कम करने के लिए तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है और एनआईसी (NIC) सर्वर की क्षमता में भी इजाफा किया गया है ताकि तकनीकी खराबी के कारण काम न रुके।
100 लाख मीट्रिक टन का 'मिशन': 19 लाख किसानों ने कराया पंजीयन
राज्य सरकार ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए 100 लाख मीट्रिक टन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किसानों का उत्साह भी काफी अधिक है; इस वर्ष रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले साल से 3 लाख 60 हजार ज्यादा है। अब तक 14 लाख 81 हजार किसान अपने स्लॉट बुक कर चुके हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया है कि स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 23 मई 2026 तय की गई है, और किसान सप्ताह में 6 दिन (सोमवार से शनिवार) अपनी उपज बेच सकते हैं।
बोनस के साथ मिल रहे 2625 रुपये, सीएम कर रहे औचक निरीक्षण
किसानों को आर्थिक मजबूती देने के लिए सरकार 2585 रुपये के समर्थन मूल्य पर 40 रुपये का बोनस जोड़कर 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कर रही है। व्यवस्थाओं में कोई चूक न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद मैदान में उतरे हुए हैं। हाल ही में उन्होंने शाजापुर, खरगोन और उज्जैन के उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। सीएम ने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी है कि किसानों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि में और बढ़ोतरी की जा सकती है।
भंडारण और मॉनिटरिंग पर सरकार की पैनी नजर
खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है। उपार्जन केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो भी केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे। गेहूं की पैकिंग के लिए जूट बारदाने के साथ-साथ पीपी और एचडीपीई बैग्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि भंडारण में कोई समस्या न आए। सरकार की इन तैयारियों और मुख्यमंत्री की सक्रियता ने किसानों के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है कि उनकी मेहनत का एक-एक दाना सम्मानजनक कीमत पर खरीदा जाएगा।



