मैहर/अमरपाटन, नरेन्द्र पटेल। मैहर जिले के अमरपाटन वन क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई, जब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से रास्ता भटककर दो जंगली हाथियों का जोड़ा रिहायशी इलाके के बेहद करीब पहुँच गया। नर और मादा हाथी का यह जोड़ा शहर से महज 3 किलोमीटर दूर ग्राम जुड़मनिया के एक बगीचे में छिपा हुआ मिला है। हाथियों की मौजूदगी की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई, जिससे आसपास के इलाकों में भारी दहशत का माहौल है। वन विभाग की टीम रात भर टॉर्च और लाठी-डंडों के साथ हाथियों की निगरानी और रेस्क्यू अभियान में जुटी रही।


जानकारी के मुताबिक, बांधवगढ़ से निकले इन हाथियों ने देर शाम जुड़मनिया गांव में प्रवेश किया। हाथियों ने ग्रामीणों के घर के पीछे स्थित बगीचे को अपना ठिकाना बनाया और वहां लगे केले के बागों को तहस-नहस कर दिया। इतना ही नहीं, आम के पेड़ों की डालियां तोड़कर उन्होंने फलों को भी अपना निवाला बनाया। बगीचे में हाथियों की चिंघाड़ और हलचल सुनकर ग्रामीणों के होश उड़ गए, जिसके बाद फौरन इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। मौके पर पहुँची टीम ने तत्काल पूरे इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा घेरा तैयार किया।


घने बगीचे और झाड़ियों के बीच छिपे इन नर-मादा हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। आबादी क्षेत्र पास होने के कारण जरा सी चूक बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। इसी गंभीरता को देखते हुए एसडीओ (SDO) और रेंजर के नेतृत्व में करीब दो दर्जन वनकर्मियों की टीम मौके पर तैनात है। वन विभाग ने मुनादी कराकर ग्रामीणों को सख्त चेतावनी दी है कि वे अपने घरों से बाहर न निकलें और न ही हाथियों के पास जाकर उन्हें छेड़ने या उत्तेजित करने की कोशिश करें।


गौरतलब है कि यह वही हाथियों का जोड़ा है, जिसने कुछ दिन पहले शहडोल जिले के ग्रामीण इलाकों में जमकर उत्पात मचाया था और फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया था। अब मैहर जिले की सीमा में इनकी एंट्री ने विभाग की नींद उड़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि जंगली हाथी घबराहट या उत्तेजना में हिंसक हो सकते हैं, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। वन अमला लगातार हाथियों के 'मूवमेंट' को ट्रैक कर रहा है।


पूरी रात चले इस तनावपूर्ण माहौल के बीच वन विभाग की कोशिश यही है कि हाथियों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से आबादी से दूर घने जंगल की ओर खदेड़ा जाए। एसडीओ यशपाल मेहरा ने बताया कि टीम लगातार निगरानी कर रही है और हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। जब तक हाथी सुरक्षित रूप से वापस नहीं लौट जाते, तब तक वन अमला और सुरक्षा बल मौके पर मुस्तैद रहेंगे। फिलहाल, जुड़मनिया और आसपास के गांवों के लोग सहमे हुए हैं और सुबह होने का इंतज़ार कर रहे हैं।