कोलकाता, 13 मई । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार के सुरक्षा निदेशक के कार्यालय से अनुरोध किया कि कोलकाता पुलिस के फरार डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास को पूछताछ के लिए ईडी के सामने पेश होने को सुनिश्चित किया जाए। बिस्वास का नाम मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामलों में सामने आया है।साथ ही, ईडी ने बिस्वास के अब तक के सेवा रिकॉर्ड का विवरण भी मांगा है।
बता दें कि केंद्रीय एजेंसी ने बिस्वास को कई नोटिस जारी कर सॉल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा था। बिस्वास को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता है।
हालांकि, कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर बिस्वास बार-बार ईडी कार्यालय में पेश होने से बचते रहे। उनके परिवार के सदस्य और करीबी सहयोगी भी उनके ठिकाने के बारे में कुछ नहीं बता सके।
आखिरकार 5 मई को, यानी हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के अगले दिन, ईडी ने बिस्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया। एजेंसी को आशंका थी कि तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के बाद वह देश छोड़कर भागने की कोशिश कर सकते हैं।
केंद्रीय एजेंसी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में शेल कंपनियों और कई लोगों के नेटवर्क से जुड़े एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का दायरा बढ़ाया है। इसी सिलसिले में ईडी ने बिस्वास के घर पर छापेमारी और तलाशी अभियान भी चलाया।
हाल ही में ईडी अधिकारियों ने इस मामले में कोलकाता के कारोबारी जॉय कामदार को गिरफ्तार किया था। जांच में कामदार के बिस्वास से करीबी संबंध सामने आए।
आरोप है कि कामदार ने बिस्वास समेत कई पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों को महंगे उपहार और सुविधाएं देकर पुलिस विभाग में प्रभाव बनाने की कोशिश की।
यह भी आरोप है कि इस प्रभाव का इस्तेमाल महंगी संपत्तियों से जुड़े विवादों में लोगों के खिलाफ फर्जी शिकायतें दर्ज कराने के लिए किया गया।
पिछले महीने जब बिस्वास के घर की तलाशी ली गई, उस समय वह वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद भी कई समन भेजे जाने के बावजूद वह ईडी के सामने पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए।
राज्य के लगभग सभी दल लंबे समय से बिस्वास पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह वर्दी में तृणमूल कांग्रेस के एजेंट की तरह काम करते थे।

