इंदौर, रविकांत वर्मा। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों भीषण गर्मी और लू (हीट वेव) की चपेट में है। शहर का अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग द्वारा लगातार जारी की जा रही चेतावनियों के बीच डॉक्टर दोपहर के समय धूप में न निकलने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों में भी शहर के ट्रैफिक जवान आग उगलती सड़कों पर अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं।


तपती सड़कों पर घंटों की मशक्कत

शहर के प्रमुख चौराहों पर दोपहर के समय हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। गर्म हवाओं और आसमान से बरसती आग के बीच ट्रैफिक पुलिस के जवान पूरी यूनिफॉर्म और सुरक्षा उपकरणों के साथ तैनात नजर आते हैं। लगातार बढ़ते तापमान के बावजूद जवानों के लिए विभाग की ओर से अब तक कोई विशेष राहत या वैकल्पिक व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। ट्रैफिक प्रबंधन के साथ-साथ जवानों को इन दिनों चल रहे विशेष हेलमेट चेकिंग अभियान की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है, जिससे उनकी शारीरिक थकान और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और बढ़ गई हैं।


स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

चिकित्सकों के अनुसार, दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच का समय सबसे घातक होता है। इस दौरान सीधी धूप में रहने से 'हीट स्ट्रोक', गंभीर निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। फील्ड पर तैनात जवानों में इन लक्षणों का खतरा सबसे अधिक बना हुआ है। राहत की बात यह होती कि विभाग द्वारा ड्यूटी के घंटों में बदलाव या ठंडे पानी और ओआरएस जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जातीं, लेकिन फिलहाल मैदान पर ऐसी कोई बड़ी पहल दिखाई नहीं दे रही है।


निर्देशों का इंतजार

हालात यह हैं कि कई जवान लगातार धूप में खड़े रहने के कारण अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं। विशेष रूप से हेलमेट और वाहन चेकिंग के दौरान होने वाली सख्ती और विवाद जवानों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर भारी पड़ रहे हैं। विभाग की ओर से अब तक भीषण गर्मी से बचाव के लिए कोई विशेष दिशा-निर्देश या 'रोटेशन ड्यूटी' जैसे आदेश जारी नहीं किए गए हैं। शहर के जागरूक नागरिकों का भी मानना है कि सुरक्षा के साथ-साथ इन कर्मठ जवानों की सेहत का ध्यान रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।