छतरपुर। सोशल मीडिया पर बिना किसी प्रमाण के न्यायालय और न्यायिक प्रक्रिया पर अनर्गल टिप्पणी करने वालों के खिलाफ छतरपुर के अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविंदर सिंह से मुलाकात कर एक शिकायती ज्ञापन सौंपा है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि बिना साक्ष्य के भ्रामक और गरिमा गिराने वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर डालने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।


मामले की जानकारी देते हुए अधिवक्ता रवि पांडे ने बताया कि इन दिनों छतरपुर शहर में ओरछा रोड थाना क्षेत्र का एक मामला चर्चा में है, जिसमें राजेश अग्रवाल नाम के एक युवक द्वारा की गई थी। इस मामले में ओरछा रोड पुलिस ने आत्महत्या के दुष्प्रेरण का अपराध कायम किया है और आरोपियों की जमानत याचिका पर न्यायालय में सुनवाई होनी है। आरोप है कि पिछले दो-तीन दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा लगातार भ्रामक कमेंट्स किए जा रहे हैं कि न्यायालय में जमानत के निराकरण के लिए- 35 लाख रुपये में डील होने और खान बाबू द्वारा सांठ-गांड कराए जाने की अनर्गल बातें फेसबुक पर लिखी जा रही हैं। अधिवक्ताओं ने साफ किया कि ये तमाम आरोप पूरी तरह निराधार, काल्पनिक और बिना किसी प्रमाण के हैं, जिनका उद्देश्य केवल और केवल न्यायालय को भ्रमित करना और न्यायपालिका की छवि को दूषित करना है।


जब मीडिया द्वारा पूछा गया कि क्या अदालत में कोई 'खान बाबू' हैं? तो अधिवक्ता रवि पांडे ने कहा कि अदालत में कई खान बाबू कार्यरत हैं, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट में किसी का स्पष्ट नाम नहीं लिखा गया है। अधिवक्ताओं की इस गंभीर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए माननीय जिला न्यायाधीश ने पूरे मामले की पुलिस से जांच कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। पुलिस जांच के बाद इस मामले में शामिल दोषियों पर कानून का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।