उचेहरा/सतना, रवि शंकर पाठक । प्रदेश सरकार लोक कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ जन सुविधाओं को ध्यान में रखकर लगातार कार्य कर रही है और जनता को इनका प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ भी मिल रहा है। लेकिन सुविधाओं का संरक्षण और सही उपयोग करना जनता की भी जिम्मेदारी है। यह बात जिला पंचायत सतना वार्ड क्रमांक 8 के सदस्य एवं संचार संकर्म स्थायी समिति के सभापति ज्ञानेन्द्र सिंह ने जनपद पंचायत उचेहरा की ग्राम पंचायत पोड़ी गराड़ा में आयोजित स्वच्छता एवं जलसंवर्धन कार्यक्रम अभियान के शुभारंभ अवसर पर कही।
उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार गांवों में भी शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, लेकिन ग्रामीण और शहरी जीवनशैली में अंतर होने के कारण इन सुविधाओं को सुरक्षित बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में जनभागीदारी और श्रमदान के माध्यम से गांव की व्यवस्थाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखा जा सकता है।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए श्री सिंह ने कहा कि पोड़ी गराड़ा से ग्रामीण स्वच्छता एवं जलसंवर्धन अभियान की 35 दिवसीय शुरुआत की जा रही है। इस अभियान के तहत प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 9 बजे तक 34 ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के सहयोग से स्वच्छता के लिए श्रमदान किया जाएगा। लोगों को जागरूक किया जाएगा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने घर के सामने की सड़क और नाली को साफ-सुथरा रखे, तो स्वच्छता के लिए किसी अन्य पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
जलसंवर्धन योजनाओं पर प्रशासन की निष्क्रियता पर उठाए सवाल
ज्ञानेन्द्र सिंह ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा 19 मार्च से 25 जून तक 100 दिवसीय जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया, लेकिन प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण क्षेत्र में अब तक कोई ठोस कार्य दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन के पास जल संरक्षण को लेकर स्पष्ट रणनीति का अभाव है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान यह सामने आया है कि पूर्व से निर्मित जल संरचनाओं का संरक्षण तक नहीं हो पा रहा है। तालाबों की मेड़ें क्षतिग्रस्त हैं, पुराने सरकारी कुएं धंस रहे हैं, नदी-नालों में बने स्टॉप डैमों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है तथा हैंडपंपों के पास बने सोखता गड्ढे निष्क्रिय पड़े हैं। खेत-तालाबों का भी कोई पता नहीं है। बारिश शुरू होने में डेढ़ माह से कम समय बचा है, लेकिन वर्षा जल को रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई है।




