भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत हजारों अतिथि विद्वानों (Guest Faculty) के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अतिथि विद्वानों की फिक्स सैलरी (निश्चित मानदेय), नियमितीकरण (Regularization) और अन्य लंबे समय से लंबित मांगों के स्थायी समाधान के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति देश के अन्य राज्यों में लागू मॉडलों का गहन अध्ययन करेगी और मध्यप्रदेश के लिए सबसे बेहतर व व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करेगी। भोपाल में भारतीय मजदूर संघ द्वारा आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब मुद्दों को 'अटकाने और लटकाने' का समय पूरी तरह खत्म हो चुका है और सरकार सकारात्मक सोच के साथ त्वरित निर्णय ले रही है।
उच्च शिक्षा मंत्री को समिति गठन के निर्देश, अन्य राज्यों के बेहतर मॉडल अपनाएगी सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच से ही उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को कड़े निर्देश जारी किए कि वे उच्च शिक्षा विभाग और तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल कर इस उच्चस्तरीय समिति का तत्काल गठन करें। उन्होंने कहा कि समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी कि वे अतिथि विद्वानों की सभी प्रमुख और जायज मांगों का बारीकी से तकनीकी परीक्षण करें। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस मामले में हरसंभव वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग देने के लिए तैयार है। जिस भी राज्य में अतिथि विद्वानों के हित में सबसे बेहतर नीतियां लागू हैं, मध्यप्रदेश सरकार उसी तर्ज पर यहाँ भी उपयुक्त मॉडल को अंगीकार करेगी।
13 आकस्मिक अवकाश और प्रसूति अवकाश जैसी सुविधाएं पहले ही दे चुकी है सरकार
कार्यक्रम के दौरान मौजूद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों के हित में उठाए गए पिछले कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने पहले ही अतिथि विद्वानों को कई महत्वपूर्ण सहूलियतें प्रदान की हैं, जिनमें प्रतिवर्ष 13 आकस्मिक अवकाश (CL), 3 ऐच्छिक अवकाश और महिला अतिथि विद्वानों के लिए गरिमापूर्ण प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) शामिल है। इसके अलावा, नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में अतिथि विद्वानों को 25 प्रतिशत का विशेष आरक्षण और वर्ष में एक बार ऐच्छिक स्थानांतरण (तबादला) की सुविधा भी दी जा रही है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिथि विद्वानों की एक बड़ी विसंगति का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें 12 महीने के बजाय 11 महीने का वेतन मिलने की जो समस्या है, उसे भी जल्द दूर कर दोनों विभागों में समान व्यवस्था लागू की जाएगी।
भारतीय मजदूर संघ ने उठाई सामाजिक सुरक्षा की मांग
इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय व प्रांतीय पदाधिकारियों ने भी अतिथि विद्वानों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री के समक्ष मांग रखी कि गेस्ट फैकल्टी को लंबे समय तक सेवा में रहने के बाद सामाजिक सुरक्षा (Social Security) और भविष्य निधि जैसे लाभ भी मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था मजबूत और सुरक्षित होगी, तो शिक्षक पूरी ऊर्जा से पढ़ा सकेंगे, जिससे राज्य का औद्योगिक विकास तेज होगा और अंततः प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
राष्ट्रीय औसत से बेहतर है एमपी का जीईआर (GER), युवाओं को नशे से बचाने के लिए चलेगा महाअभियान
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश की समृद्ध भारतीय शिक्षा परंपरा और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने गर्व जताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और हमारे राज्य का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) राष्ट्रीय औसत से भी काफी बेहतर है। अब कॉलेजों में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि नवाचार और कौशल विकास (Skill Development) पर केंद्रित रोजगारोन्मुखी शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने उपस्थित सभी प्राध्यापकों और अतिथि विद्वानों से समाजहित में एक विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह मध्यप्रदेश सरकार ने कड़े कदम उठाकर राज्य से नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा किया है, ठीक उसी तरह अब युवाओं को नशे की गर्त में जाने से बचाने के लिए प्रदेशव्यापी 'नशा मुक्ति अभियान' चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस सामाजिक बुराई के खिलाफ चलाए जाने वाले जनजागरण अभियान में सभी शैक्षणिक संस्थानों, कुलपतियों और प्राध्यापकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है।


