छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिले में हुई तेज बारिश के बाद बुंदेलखंड के 'केदारनाथ' के नाम से प्रसिद्ध श्री जटाशंकर धाम का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। पहाड़ियों से बहते झरनों का पानी मंदिर परिसर तक पहुंचने लगा है, वहीं गोमुख से निकलने वाली प्राकृतिक जलधारा का प्रवाह भी पहले की अपेक्षा काफी तेज हो गया है। चारों ओर फैली हरियाली, कल-कल बहते झरने और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित भगवान भोलेनाथ का यह प्राचीन धाम इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
छतरपुर जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर तथा बिजावर तहसील से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन शिवधाम चारों ओर से ऊंची पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। लगातार हुई बारिश के बाद पहाड़ियों से उतरता पानी मंदिर परिसर, गुफा, गोमुख और चौक तक पहुंच गया। जलधारा के तेज बहाव के कारण कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं को आवाजाही में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जटाधारी भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे।
जटाशंकर धाम केवल प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कभी बुंदेलखंड के कुख्यात बागी रहे मूरत सिंह ने इसी धाम में भगवान शिव के चरणों में अपने हथियार समर्पित कर आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उन्होंने अपना अधिकांश जीवन जटाशंकर धाम में भगवान शिव की भक्ति और सेवा में बिताया। यह प्रसंग आज भी स्थानीय लोगों के बीच श्रद्धा और परिवर्तन के प्रतीक के रूप में सुनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि जटाशंकर धाम के गोमुख से वर्षभर प्राकृतिक जलधारा प्रवाहित होती रहती है, जिससे भगवान शिव का निरंतर जलाभिषेक होता है। मंदिर परिसर में स्थित तीनों पवित्र कुंड भी पूरे वर्ष जल से भरे रहते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन कुंडों में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों सहित कई बीमारियों में लाभ मिलता है। हालांकि, इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
यह धाम नवविवाहित दंपतियों के पूजन, बच्चों के मुंडन संस्कार और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां भगवान भोलेनाथ को खोवा (मावा) से बने कलाकंद का प्रसाद अर्पित करने की परंपरा है। प्राकृतिक सौंदर्य, स्वच्छ वातावरण और पहाड़ों के बीच स्थित दिव्य शिवधाम का दर्शन करने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
सावन माह के आगमन के साथ जटाशंकर धाम में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। स्थानीय अनुमान के अनुसार सावन के दौरान प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु यहां दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। बारिश के बाद निखरे इस प्राकृतिक और धार्मिक स्थल ने एक बार फिर बुंदेलखंड की आस्था और पर्यटन की पहचान को नई ऊंचाई प्रदान की है।




