भोपाल, 22 अप्रैल । मध्य प्रदेश में बच्चों से जुड़े मुद्दों पर एनिमेशन फ़िल्में बनाई जाएगी, क्योंकि पारंपरिक संचार माध्यमों की जगह एनिमशन, कॉमिक्स आदि ने ले ली है।

राज्य की राजधानी भोपाल में एनिमेशन फिल्म बनाने वाली संस्था सहित बच्चों के बीच काम करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधियों की बुधवार को बैठक हुई। इस बैठक में तय किया गया है कि बच्चों से जुड़े मुद्दों पर एनिमेशन फिल्में बनाई जाएगी। एवीसीजी के संस्थापक निदेशक मनीष राजोरिया ने एनिमेशन की शक्ति का जिक्र किया और बताया कि कैसे पारंपरिक संचार माध्यमों की जगह नई कहानी कहने वाली एनिमेशन, पात्रों और कॉमिक्स ने ले ली है।

यूनिसेफ मध्य प्रदेश के प्रमुख विलियम हैनलॉन ने एनिमेशन की सार्वभौमिक अपील से जनता को जोड़ने, विशेष रूप से बाल अधिकारों की वकालत करने के एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है, वहीं यह कुछ अनूठी चुनौतियां भी प्रस्तुत करती है, जिनका सावधानीपूर्वक सामना करना आवश्यक है।

यूनिसेफ मध्य प्रदेश के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने कहा कि एनिमेशन में जटिल जानकारी को सरल और सभी के लिए सुलभ बनाने की अनूठी क्षमता है। एनिमेशन को आकर्षक कहानी कहने के साथ मिलाकर, हम बाल स्वास्थ्य, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, टीकाकरण, बाल संरक्षण और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रभावी ढंग से संदेश प्रसारित कर सकते हैं।

पर्यटन विभाग के राम तिवारी ने एनीमेशन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे समर्थन और पर्यटन एवं फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एनिमेशन के उपयोग के बारे में बताया। जागरण सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संचार निदेशक प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक मशीन है और इसमें मानवीय जुड़ाव और सोच की आवश्यकता होती है।

इस मौके पर मौजूद लोगों ने एनिमेशन के उपयोग, चुनौतियों और विचारों पर अपने विचार साझा किए। साथ ही तय किया गया कि बाल स्वास्थ्य, बिजली गिरने जैसे सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता लाने के लिए नि:शुल्क एनिमेशन फ़िल्में बनाई जायेंगी।