भोपाल, पंकज यादव। वर्तमान में पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम कर्ज के जाल में डूबी मध्य प्रदेश सरकार बाजार से नया ऋण लेने के साथ-साथ अब आंतरिक स्तर पर कड़े वित्तीय सुधार और 'कॉस्ट कटिंग' की राह पर चल पड़ी है। वित्तीय संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से सरकारी, निगम-मंडलों, सार्वजनिक उपक्रमों या विश्वविद्यालयों के शासकीय खर्च पर होने वाली सभी विदेश यात्राओं पर पूर्णतः रोक लगा दी है।
केवल अत्यंत अपरिहार्य और बेहद जरूरी मामलों को छोड़ कर राज्य शासन और उससे जुड़ी सभी सहयोगी संस्थाओं पर यह प्रतिबंध पूरी सख्ती से लागू होगा। इतना ही नहीं, फिजूलखर्ची रोकने के लिए सभी सरकारी संस्थानों व विभागों में महंगे गिफ्ट (उपहार) देने और भव्य स्वागत समारोह जैसे आयोजनों को भी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। खर्चों को सीमित करने के लिए अब दो से तीन अधिकारियों के बीच केवल एक ही शासकीय वाहन आवंटित किया जाएगा, यानी वाहनों की सख्त पूलिंग की जाएगी।
बजट आवंटन को बेहतर बनाने के लिए वित्त विभाग ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
वित्त विभाग ने इस बड़ी वित्तीय कटौती को लेकर शासन के सभी प्रशासनिक विभागों, विभागाध्यक्षों (एचओडी), संभागीय आयुक्तों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों के प्रबंध संचालकों (एमडी) और सभी जिला कलेक्टरों (जिलाध्यक्षों) को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग ने इस मितव्ययिता के पीछे मुख्य आधार दिया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट आवंटन के खिलाफ खर्च की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व बेहतर बनाने तथा अगले आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में जरूरी वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए ये कड़े प्रतिबंध लगाए जाना बेहद आवश्यक हो गया था।
कैलेंडर-डायरी की प्रिंटिंग बंद; होटलों की बजाय सरकारी परिसरों में होंगे आयोजन और वेबिनार
जारी दिशा-निर्देशों में वित्तीय अनुशासन को लेकर स्पष्ट किया गया है कि नए साल या किसी भी अन्य विशेष अवसरों पर विभागों द्वारा की जाने वाली सरकारी कैलेंडर और डायरी की प्रिंटिंग (छपाई) व नई खरीदी पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके साथ ही, अधिकांश विभाग जो अक्सर बड़े-बड़े निजी होटलों में वर्कशॉप, ट्रेनिंग या समीक्षा बैठकों का खर्चीला आयोजन करते हैं, उस पर भी रोक लगा दी गई है। निर्देशित किया गया है कि जहां तक संभव हो सके ऐसी सभी बैठकें और कार्यशालाएं केवल शासकीय संस्थानों या सरकारी भवनों के भीतर ही आयोजित की जाएं।
विभागों को यह भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि भौतिक रूप से बड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के स्थान पर अब वर्चुअल ट्रेनिंग (ऑनलाइन प्रशिक्षण) और वेबिनार को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा, यदि किसी शासकीय अधिकारी को किसी अन्य पद का अतिरिक्त कार्यभार (एडिशनल चार्ज) सौंपा जाता है, तो उस अतिरिक्त पद के लिए आवंटित सरकारी वाहन उन्हें बिल्कुल नहीं दिया जाएगा। वह अतिरिक्त वाहन उचित पात्रता रखने वाले अन्य जरूरतमंद शासकीय अधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे विभागों में अटैच अनुबंधित (किराए के) वाहनों पर होने वाले भारी खर्च में बड़ी कमी लाई जा सकेगी।
इकोनॉमी क्लास में ही होगी हवाई यात्रा; दफ्तरों के इंटीरियर और कंसलटेंसी पर लगा बैन
अब शासकीय काम से यात्रा करने वाले किसी भी अधिकारी को इकोनॉमी क्लास (Economy Class) के अलावा अन्य किसी भी महंगी या वीआईपी श्रेणी में हवाई यात्रा करने की पात्रता नहीं होगी। सरकारी दफ्तरों के नवीनीकरण और इंटीरियर (साज-सज्जा) पर भी अब कोई भारी-भरकम बजट खर्च नहीं किया जा सकेगा। विभागों में व्यावसायिक उपयोग के लिए लगे किराए के वाहनों की संख्या में भी भारी कटौती की जाएगी।
वाहनों को पूल किए जाने को लेकर विभागाध्यक्ष के स्तर पर एक विस्तृत समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद वाहनों के आवंटन का युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) होगा, जिसके तहत दो या इससे अधिक अफसरों के बीच केवल एक ही वाहन साझा (पूल) किया जा सकेगा। इसके साथ ही, सभी विभागों में हर तरह की नई कंसलटेंसी सर्विसेज (परामर्श सेवाओं) पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। वित्त विभाग ने यह भी कड़ा निर्देश दिया है कि सभी सरकारी निगम, मंडल और उपक्रमों से संबंधित लाभांश (डिविडेंड) की अधिकतम दी जा सकने वाली राशि को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द राज्य शासन के मुख्य खाते में अनिवार्य रूप से जमा कराना होगा।
संजय नगायच ने खाद्य मंत्री से वापिस बुलाया वाहन
वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच ने वित्त मंत्रालय के द्वारा जारी किए गए इस आदेश के बाद खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत की सेवा में लगे निगम के वाहन को वापिस बुला लिया। यदि इसी तरह अन्य निगम मंडलों के अध्यक्ष भी निर्देश जारी कर दें और वित्त के आदेश मंत्रियों पर भी सख्ती से लागू कर दिए जाएं तो वाहनों के दुरुपयोग को काफी हद तक रोका जा सकता है और इससे सरकार हर साल करोड़ों रुपए की बचत कर सकती है।




