बद्रीनाथ | उत्तराखंड के पवित्र धाम बद्रीनाथ में अपनी साधना पूर्ण करने के बाद पीठाधीश्वर पूज्य बागेश्वर धाम सरकार (पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) ने देश की राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। बागेश्वर सरकार ने भारत में "एक देश, एक चुनाव" (One Nation, One Election) की अवधारणा का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जब भारत को इस नए मंत्र को अपना लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों के कारण देश का हजारों करोड़ रुपया व्यर्थ खर्च होता है, जिससे देश को अब मुक्ति मिलनी चाहिए।
पंच से लेकर सांसद तक का चुनाव एक साथ कराने की वकालत
पूज्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस व्यवस्था को निचले स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश में पंच, सरपंच, मेयर, पार्षद, विधायक और सांसद तक के सभी चुनाव एक ही समय पर होने चाहिए।
"बार-बार चुनाव होने से न केवल देश का खजाना खाली होता है, बल्कि भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती है और पूरा प्रशासनिक अमला हमेशा इसी व्यस्तता में लगा रहता है। यदि सभी चुनाव एक साथ होंगे, तो देश को इन तमाम झंझटों और भारी-भरकम व्यवस्थाओं से बड़ी राहत मिलेगी।"
- पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पीठाधीश्वर, बागेश्वर धाम
नेताओं को भी होगा फायदा, एक ही सभा में हो जाएगा सबका प्रचार
बागेश्वर सरकार ने इस व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे राजनीतिक दलों और नेताओं को भी बड़ा लाभ पहुंचेगा। वर्तमान व्यवस्था में नेताओं को हर कुछ महीनों में अलग-अलग राज्यों या स्थानीय निकायों के चुनाव प्रचार में दौड़ना पड़ता है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से नेताओं का समय बचेगा; वे एक ही चुनावी सभा और एक ही प्रचार अभियान के जरिए गांव के पंच से लेकर देश के सांसद तक के सभी उम्मीदवारों का प्रचार एक साथ कर सकेंगे। इससे राजनेताओं का ध्यान बार-बार चुनाव लड़ने के बजाय देश और जनता के विकास कार्यों पर अधिक केंद्रित हो सकेगा।
डॉलर के मुकाबले भारत को मजबूत आर्थिक फैसलों की जरूरत
बद्रीनाथ की वादियों से देश के संसाधनों को बचाने का संदेश देते हुए बागेश्वर सरकार ने कहा कि "एक देश, एक चुनाव" अपनाने से भारत का समय, धन और मानव संसाधन तीनों सुरक्षित होंगे। उन्होंने इस विषय पर किसी भी जल्दबाजी के बजाय पूरे देश में एक व्यापक और सकारात्मक चर्चा कराए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए एक और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जो कि एक बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को और अधिक संगठित करने तथा देश हित में बेहद मजबूत व कड़े निर्णय लेने की महती आवश्यकता है।



