दमोह, राजेन्द्र तिवारी। मध्यप्रदेश के दमोह कलेक्ट्रेट कार्यालय से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह यादव के गोपनीय कक्ष (चेंबर) के भीतर होने वाली रणनीतिक चर्चाओं और निरीक्षण की योजनाओं को बाहर लीक किया जा रहा था। इस गंभीर सुरक्षा चूक का खुलासा होने के बाद कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक कर्मचारी को तत्काल निलंबित कर दिया है और पूरे कार्यालय की संचार व्यवस्था को जांच के दायरे में ले लिया है।
इस पूरे 'स्पाइंग' (जासूसी) कांड का खुलासा तब हुआ जब कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह यादव अपने अधिकारियों के साथ एक गोपनीय निरीक्षण की योजना बना रहे थे। अभी योजना बन ही रही थी कि संबंधित क्षेत्र से कलेक्टर के पास फोन आ गया, जिससे उन्हें गहरा संदेह हुआ। कलेक्टर को यह समझते देर नहीं लगी कि चेंबर के भीतर की हर बात 'लाइव' बाहर पहुँचाई जा रही है। मामले की पुष्टि के लिए उन्होंने तत्काल अपना मोबाइल सक्रिय किया और स्वयं दफ्तर के अन्य कमरों की औचक तलाशी लेने निकल पड़े।
कलेक्टर जब तलाशी लेते हुए अपने पीए (निजी सहायक) के कक्ष में पहुँचे, तो वहां का नजारा देख दंग रह गए। कमरे में एक मोबाइल फोन चालू हालत में मिला, जिसके जरिए कलेक्टर चेंबर की आवाजें स्पष्ट सुनाई दे रही थीं। इस बड़ी गद्दारी के सामने आते ही कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मौके पर तैनात कर्मचारी सचिन खरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही संदेह के घेरे में आए कुछ अन्य कर्मचारियों को भी उनके मूल विभाग वापस भेजने की कार्रवाई की गई है।
मामले की गहराई तक जाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में उपयोग किए जा रहे पुराने टेलीफोन सेटों को सील कर दिया गया है। इन उपकरणों को तकनीकी विशेषज्ञों के पास भेजा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन फोन में कोई 'बग' या सुनने वाला उपकरण लगाया गया था। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यह केवल एक व्यक्ति की करतूत है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, जो कलेक्ट्रेट की गोपनीय सूचनाओं का सौदा कर रहा था।
और भी नाम आ सकते हैं सामने
कलेक्टर कार्यालय के भीतर हुई इस 'जासूसी' के बाद पूरे दमोह कलेक्ट्रेट में खौफ और सन्नाटे का माहौल है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यह मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि इससे सरकार की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि वर्तमान में एक गोपनीय जांच चल रही है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है। फिलहाल, कलेक्ट्रेट की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है।



