पणजी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गोवा की विशेष पीएमएलए अदालत में दो पादरियों, एक पूर्व सरकारी अधिकारी और एक निजी रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। मामला उत्तर गोवा के कारंजालेम स्थित एक भूमि पर किरायेदारी अधिकारों से धोखाधड़ी के जरिए मूल परिवार को वंचित करने और बाद में उस जमीन के व्यावसायिक दोहन से करोड़ों रुपए की अवैध कमाई करने से जुड़ा है।

ईडी के अनुसार, इस मामले की जांच पणजी पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 18 नवंबर 2004 से 5 दिसंबर 2006 के बीच आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर सिटी सर्वे, पणजी की पी.टी. शीट नंबर 162 के चाल्टा नंबर 44 स्थित 2,479 वर्गमीटर भूमि के 'फॉर्म-बी' में 'होल्डर' के रूप में गोवा एवं दमन के आर्कडायोसिस का नाम दर्ज कराया। इससे मूल किरायेदार परिवार अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हो गया।

एफआईआर के आधार पर ईडी ने प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान 16 दिसंबर 2025 को गोवा में पीएमएलए की धारा 17 के तहत कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।

वित्तीय जांच में ईडी को पता चला कि आरोपियों ने कथित रूप से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भूमि का स्वामित्व आर्कडायोसिस के नाम दर्ज कराया और बाद में 9 अप्रैल 2007 को इसे एक निजी रियल एस्टेट डेवलपमेंट फर्म को मात्र 61.97 लाख रुपए में बेच दिया। इसके बाद उक्त भूमि पर एक आवासीय-सह-व्यावसायिक परियोजना विकसित की गई और उसमें निर्मित इकाइयों की बिक्री से लगभग 27.10 करोड़ रुपए की कथित अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) प्राप्त हुई।

ईडी ने बताया कि जांच के दौरान पहले ही लगभग 27.10 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैचमेंट) किया जा चुका है। इनमें कारंजालेम स्थित एक होटल-सह-रेस्तरां परिसर और दो अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार ये संपत्तियां या तो कथित अपराध से अर्जित आय हैं अथवा उसके समतुल्य मूल्य की परिसंपत्तियां हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि मामले में दाखिल अभियोजन शिकायत के आधार पर विशेष पीएमएलए अदालत में आगे की कानूनी कार्यवाही होगी। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान एकत्र साक्ष्य कथित फर्जीवाड़े, भूमि हस्तांतरण और उससे अर्जित आर्थिक लाभ की कड़ियों की पुष्टि करते हैं। मामले में आगे की जांच भी जारी है।