छिंदवाड़ा, जीशान अंसारी। मध्य प्रदेश सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच छिंदवाड़ा जिला अस्पताल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में अस्पताल की जर्जर स्थिति और प्रबंधन की संवेदनहीनता साफ दिखाई दे रही है। वीडियो में एक मरीज के परिजन उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर खुद ही एक्स-रे लैब तक ले जाते दिख रहे हैं, जहाँ रास्ते की टूटी सड़क उनके लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है।


अस्पताल परिसर के भीतर की सड़क जगह-जगह से उखड़ी हुई है और उसमें गहरे गड्ढे हो चुके हैं। इस उबड़-खाबड़ रास्ते पर जब परिजन स्ट्रेचर को खींचते हैं, तो उसके पहिए बार-बार गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे स्ट्रेचर पर लेटे मरीज को असहनीय झटके लग रहे हैं। इस दौरान मरीज के साथ मौजूद महिलाएं, बुजुर्ग और युवक मिलकर जैसे-तैसे स्ट्रेचर को संतुलित करते नजर आए, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया।


हैरानी की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर एक भी वार्डबॉय या अस्पताल का कर्मचारी नजर नहीं आया। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रैक्चर, स्पाइन इंजरी या सिर की चोट वाले गंभीर मरीजों के लिए इस तरह के झटके जानलेवा साबित हो सकते हैं। एक ओर सरकार आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए मुफ्त और विश्वस्तरीय इलाज का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल में मरीजों को वार्ड से जांच कक्ष तक सुरक्षित पहुंचाना भी दूभर हो गया है। सड़क की यह हालत किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।


वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है और स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर अस्पताल परिसर की सड़कों की मरम्मत के लिए बजट कहाँ खर्च किया जा रहा है? गंभीर मरीजों की सुरक्षा और सहायता की जिम्मेदारी किसकी है? फिलहाल, इस वायरल वीडियो ने प्रशासनिक दावों की हकीकत को जनता के सामने लाकर खड़ा कर दिया है और अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन इस दिशा में क्या सुधारात्मक कदम उठाता है।