भोपाल/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। 294 सीटों वाली विधानसभा में 206 सीटें जीतकर भाजपा पहली बार सत्ता के शिखर पर पहुँची है। इस ऐतिहासिक 'बंगाल विजय' की पटकथा लिखने में मध्य प्रदेश के नेताओं की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। विशेष रूप से सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 'स्ट्राइक रेट' चर्चा का विषय बना हुआ है, जिन्होंने जिन 7 सीटों पर पसीना बहाया, उनमें से 6 पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया है।


डॉ. मोहन यादव के चुनावी अभियान की शुरुआत 2 अप्रैल को बांकुरा जिले से हुई थी। यहाँ उन्होंने न केवल भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन में शिरकत की, बल्कि एक विशाल संयुक्त जनसभा को भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री का यह 'बांकुरा क्लस्टर' भाजपा के लिए सबसे मजबूत किला साबित हुआ, जहाँ जिले की सभी सीटों पर पार्टी ने क्लीन स्वीप किया। उनकी रैलियों में उमड़ी भीड़ और स्थानीय मुद्दों के साथ उनके जुड़ाव ने इस क्षेत्र में टीएमसी के गढ़ को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।


चुनावी जंग के दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री कोलकाता और मेदिनीपुर के मोर्चे पर डटे रहे। मेदिनीपुर सीट पर उनका जादू सिर चढ़कर बोला, जहाँ भाजपा के दिग्गज प्रत्याशी दिलीप घोष ने टीएमसी उम्मीदवार को 30 हजार से अधिक मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी। हालांकि, कोलकाता की कमरहाटी सीट पर समीकरण उनके पक्ष में नहीं रहे और यहाँ भाजपा उम्मीदवार अरूप चौधरी को हार का सामना करना पड़ा। यही वह एकमात्र सीट रही जहाँ मुख्यमंत्री का दांव खाली गया, जिससे उनका कुल स्ट्राइक रेट 86 प्रतिशत रहा।


इस मिशन के लिए भाजपा हाईकमान ने मध्य प्रदेश से केवल चुनिंदा और प्रभावशाली चेहरों को ही मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधायक रामेश्वर शर्मा, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और राज्यसभा सांसद डॉ. उमेश नाथ महाराज को विशेष जिम्मेदारी दी गई थी। इन नेताओं ने न केवल सभाएं कीं, बल्कि संगठन स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने का काम भी किया। मध्य प्रदेश के इन पांच नेताओं की टीम ने बंगाल के अलग-अलग अंचलों में मोर्चा संभालकर भाजपा की जीत की राह आसान की।


मप्र के इन दिग्गजों की मेहनत का नतीजा है कि आज पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की लहर हकीकत में बदल चुकी है। भाजपा की इस जीत में 'एमपी मॉडल' की संगठनात्मक शक्ति और डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व कौशल की सराहना की जा रही है। अब जब बंगाल में भाजपा सरकार बनाने जा रही है, तो दिल्ली से लेकर भोपाल तक इन नेताओं के स्ट्राइक रेट और चुनावी रणनीति की गूँज सुनाई दे रही है।