भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी में अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हजारों चयनित शिक्षकों के सब्र का बांध बुधवार को उस समय टूट गया, जब उन्होंने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) कार्यालय के सामने डेरा डाल दिया। भारी विरोध और बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार प्रदेश सरकार को झुकना पड़ा और देर शाम करीब 4,000 माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए। पिछले 9 महीनों से नियुक्ति की बाट जोह रहे अभ्यर्थियों के लिए यह खबर किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। अब चयनित उम्मीदवारों को 12 मई से 18 मई 2026 के बीच ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने मनपसंद स्कूलों का चयन (चॉइस फिलिंग) करना होगा।


भर्ती की यह दास्तां किसी लंबी परीक्षा से कम नहीं रही है। यह प्रक्रिया साल 2022 में शुरू हुई थी, जिसने पात्रता और चयन परीक्षाओं के कई दौर देखे। अप्रैल 2025 में हुई मुख्य चयन परीक्षा के बाद जब सितंबर में परिणाम घोषित हुआ, तो 10,700 अभ्यर्थियों के नाम सूची में आए। लेकिन विडंबना यह रही कि मेरिट में नाम आने के बावजूद इन भावी शिक्षकों को नियुक्ति के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। अभ्यर्थियों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि जब पद खाली हैं और चयन हो चुका है, तो सरकार उन्हें स्कूलों तक पहुँचने से क्यों रोक रही है? बुधवार के प्रदर्शन ने इस असंतोष को ज्वालामुखी की तरह बाहर ला दिया, जिससे विभाग को आनन-फानन में आदेश जारी करने पड़े।


इस महत्वपूर्ण घोषणा के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के दायरे में है। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने आधिकारिक सूचना जारी कर दी है और सरकार योग्य उम्मीदवारों को समय पर नियुक्ति देने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग का कहना है कि चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही अंतिम आवंटन पत्र भी थमा दिए जाएंगे। हालांकि, अभ्यर्थियों का एक बड़ा वर्ग अब भी शेष पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहा है, लेकिन फिलहाल 4,000 नियुक्तियों ने एक बड़ी राहत दी है।


लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, माध्यमिक और प्राथमिक (विशेष विषय) शिक्षकों को अपने आवंटित संभाग या जिले के सभी स्कूलों को प्राथमिकता क्रम में भरना अनिवार्य होगा। विभाग ने एक सख्त चेतावनी भी जारी की है—अगर किसी अभ्यर्थी ने 18 मई की समय सीमा के भीतर विकल्प नहीं भरे, तो उसे खाली बची हुई सीटों पर कहीं भी तैनात कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में अभ्यर्थी को अपनी पसंद का स्कूल खोना पड़ सकता है। इसके साथ ही पोर्टल शुल्क जमा करने के बाद ही आवेदन पूर्ण माना जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि इस प्रक्रिया के बाद किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत दावों पर विचार नहीं किया जाएगा।


नियुक्ति की इस राह में अभी दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) का अंतिम पड़ाव बाकी है। जिन अभ्यर्थियों के नाम 'सशर्त' सूची में हैं, उनके दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। केवल वही उम्मीदवार अंतिम रूप से स्कूलों तक पहुँच पाएंगे जिनके दस्तावेज पूरी तरह सही पाए जाएंगे। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षक के विशेष पदों जैसे गायन-वादन और नृत्य के लिए पात्र अभ्यर्थियों की सूची अलग से जारी की जाएगी। फिलहाल, एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर हलचल तेज है और हजारों शिक्षक अपनी नई पारी की शुरुआत के लिए डिजिटल दुनिया में अपनी प्राथमिकताएं दर्ज करने की तैयारी कर रहे हैं।