जयपुर, 15 मई । राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को जन आंदोलन में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत करना समय की आवश्यकता है और भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान केवल स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से ही किया जा सकता है।
राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सौर ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता राज्य के रूप में अपनी पहचान को लगातार मजबूत कर रहा है। राज्य में गैर-पारंपरिक ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं और यह तेजी से हरित ऊर्जा क्रांति के केंद्र के रूप में उभर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन का सबसे किफायती, प्रभावी और टिकाऊ विकल्प है। संसाधनों का अनुशासित और विवेकपूर्ण उपयोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की कुंजी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'राष्ट्र पहले' दृष्टिकोण और ईंधन की 'एक-एक बूंद' बचाने के आह्वान का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी वाहनों के संयमित उपयोग और व्यापक ऊर्जा संरक्षण उपायों को बढ़ावा देने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण और ईंधन की बचत को जन भागीदारी से संचालित एक जन आंदोलन बनाना होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
पेट्रोल और डीजल की बचत को समय की आवश्यकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान केवल स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से ही किया जा सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलती है।
राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हुए मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि राज्य प्रधानमंत्री मोदी के '2047 तक विकसित भारत' के विजन के अनुरूप ऊर्जा शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान देश के सबसे निवेश-अनुकूल राज्यों में से एक है। उद्योगों और निवेशकों को पूर्ण सरकारी समर्थन और अनुकूल कारोबारी माहौल दिया जाएगा। सौर, पवन, जैव-ऊर्जा, पंप स्टोरेज और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश के प्रस्ताव सरकार की प्रगतिशील नीतियों की सफलता को दर्शाते हैं और राजस्थान के लिए एक नए आर्थिक युग की शुरुआत का संकेत देते हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के 2030 तक भारत में 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि राजस्थान इन लक्ष्यों की ओर तेजी से प्रगति कर रहा है, जिसकी अनुमानित सौर ऊर्जा क्षमता 828 गीगावाट और पवन ऊर्जा क्षमता 284 गीगावाट है। राज्य में 47 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जिससे राजस्थान सौर परियोजना कार्यान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बन गया है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 24,410 मेगावाट की वृद्धि हुई है। नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ईंधन, ऊर्जा भंडारण और हरित हाइड्रोजन में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 शुरू की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना के तहत कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए कृषि भूमि पर लघु सौर परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। 4,000 मेगावाट से अधिक की परियोजनाएं पहले ही चालू हो चुकी हैं, जबकि 6,500 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली परियोजनाओं का आवंटन किया जा चुका है।
उन्होंने आगे बताया कि राज्य के उद्यमों और संयुक्त उद्यमों के माध्यम से 4,670 मेगावाट क्षमता वाले सौर पार्क स्थापित किए गए हैं, जबकि 12,000 मेगावाट से अधिक की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ऊर्जा संरक्षण और ईंधन दक्षता एक सामूहिक जिम्मेदारी बन गई है। राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने, सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और पूरे राजस्थान में फास्ट-चार्जिंग बुनियादी ढांचे की स्थापना पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

