छतरपुर (पंकज यादव)। देश को खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और तिलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय तिलहन मिशन के तहत देश भर में 600 से अधिक वैल्यू चैन क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। सरकार की मंशा इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए देश के अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की है, लेकिन छतरपुर जिले में विभागीय अनदेखी और निजी एजेंसियों की मनमानी के चलते इस योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है।


ताजा मामला छतरपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पठादा और ग्राम पंचायत बौंड़ा से सामने आया है, जहां योजना के तहत बीज वितरण के नाम पर गरीब किसानों से अवैध वसूली और कम बीज देने का एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। ग्रामीणों और पीड़ित किसानों से मिली जानकारी के अनुसार, भारत ग्रामोदय प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड नाम की एक एफपीओ (कृषक उत्पादक संगठन) कंपनी ने इस पूरी वसूली को अंजाम दिया है। दरअसल, राष्ट्रीय तिलहन मिशन के तहत विकसित किए जा रहे वैल्यू चैन क्लस्टरों के माध्यम से इन ग्राम पंचायतों के किसानों को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 1 क्विंटल (100 किलोग्राम) मूंगफली का उन्नत बीज निशुल्क या अनुदान पर वितरित किया जाना था। इसी वितरण की आड़ में भारत ग्रामोदय प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने सीधे-साधे ग्रामीणों को अपना शिकार बना लिया और उनसे मोटी रकम ऐंठ ली।


किसान बोले- पैसे ज्यादा लिए, बीज भी कम दिया

ग्राम पठादा के निवासी सुरेश यादव, चतुर यादव, हरदास, बैजनाथ अहिरवार, किसुन यादव, कटारे का पुरवा निवासी धर्मपाल पटेल, गोरीबाई पटेल, टिकरा पुरवा के भगनलाल अहिरवार सहित दर्जनों अन्य प्रभावित किसानों ने इस पूरे घोटाले की पोल खोली है। उक्त किसानों ने बताया कि भारत ग्रामोदय प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने उनसे जबरन सदस्यता शुल्क के नाम पर 1500-1500 रुपये की नगद राशि वसूल की, जबकि इसके बदले में उन्हें जो आधिकारिक पावती थमाई गई, वह महज 1100 रुपये की थी। यानी सीधे तौर पर प्रति किसान 400 रुपये की अतिरिक्त अवैध वसूली की गई। इसके अलावा योजना के नियमों के मुताबिक किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 क्विंटल मूंगफली का बीज मिलना था, लेकिन उसकी बजाय उन्हें केवल 90 किलो (30-30 किलो के तीन बैग) बीज ही वितरित किया गया, मतलब प्रति किसान 10 किलो बीज की कटौती भी की गई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सिर्फ ग्राम पंचायत पठादा में ही करीब 400 किसानों से यह राशि वसूल कर उन्हें कम बीज थमाया गया है। ठीक इसी तर्ज पर ग्राम पंचायत बौंड़ा में भी बड़े पैमाने पर ग्रामीणों से अवैध वसूली कर कम बीज दिया गया।


अधिकारियों तक बात पहुंचते ही मची खलबली

इस फर्जीवाड़े में सबसे मजे की बात तब सामने आई, जब क्षेत्र के कुछ जागरूक ग्रामीणों और युवाओं ने इस अवैध वसूली और कम बीज दिए जाने के खिलाफ आवाज उठाई और मामले की शिकायत कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दी। शिकायत होते ही प्रशासनिक अमले और दोषी कंपनी के प्रतिनिधियों में खलबली मच गई। खुद को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए आनन-फानन में अधिकारियों और कंपनी द्वारा किसानों को उनके पैसे वापस लौटाने की बात कही जाने लगी।प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दबाव बढ़ता देख बुधवार को ग्राम पंचायत बौंड़ा के पीड़ित किसानों को उनसे वसूली गई पूरी रकम वापस दिला दी गई है। वहीं, पठादा ग्राम पंचायत के आक्रोशित ग्रामीणों को भी विभाग और कंपनी के जिम्मेदारों द्वारा यह भरोसा दिया गया है कि उनकी पूरी रकम आज यानी गुरुवार को हर हाल में वापस करा दी जाएगी।


उपसंचालक कृषि बोले- विस्तृत जांच कर दोषियों पर की जाएगी कड़ी कार्रवाई

इस गंभीर मामले में जब छतरपुर जिले के उपसंचालक (कृषि) अनिल मिश्रा से बात की गई, तो उन्होंने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि ग्रामीणों और किसानों के माध्यम से इस प्रकार की गंभीर शिकायत विभाग को प्राप्त हुई है। बीज का वितरण एफपीओ के माध्यम से कराया जा रहा है। हमारी प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि सदस्यता शुल्क के नाम पर किसानों से पैसे लिए गए हैं, जिसे हमारे संज्ञान में आते ही तुरंत रोक दिया गया है और ली गई राशि को तत्काल संबंधित किसानों को वापस लौटाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। श्री मिश्रा ने स्पष्ट किया कि 1100 रुपये की रसीद देकर किसानों से 1500 रुपये ऐंठने और प्रति हेक्टेयर 10 किलो बीज कम देने के संगीन आरोपों की गहराई से जांच कराई जा रही है। उन्होंने क्षेत्र के किसानों को आश्वस्त किया है कि इस पूरे मामले की एक विस्तृत और निष्पक्ष जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी और जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी या एफपीओ कंपनी का प्रतिनिधि दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।