छतरपुर, जेके आशु। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश छतरपुर आशीष श्रीवास्तव ने बहुचर्चित मोहनी हत्याकांड में आरोपी गोवर्धन पटेल को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1) एवं 115(2) के तहत दोषी पाया।
अभियोजन के अनुसार 10 अक्टूबर 2024 की शाम करीब 5:15 बजे 8 वर्षीय मोहनी, हर्ष और युवराज अर्द्धकुंवारी माता मंदिर में पूजा करने जा रहे थे। इसी दौरान ग्राम देवकुलिया निवासी आरोपी गोवर्धन पटेल ने मोहनी को यह कहते हुए पकड़ लिया कि वह उसे अधिक चिढ़ाती है और उसे पैर से पकड़कर पानी से भरे कुएं में सिर के बल फेंक दिया। घटना के बाद आरोपी ने कुएं की मुंडेर से ईंट निकालकर मोहनी पर फेंकी, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट लगी। घटना को देखकर साथ मौजूद बच्चों ने शोर मचाया और परिजनों को सूचना दी।
परिजन और ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे तथा मोहनी को कुएं से बाहर निकालकर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की रिपोर्ट उसी रात थाना राजनगर में दर्ज कराई गई। पुलिस जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से मृतिका की चांदी की पायल बरामद की गई तथा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक न होने और घटना अचानक आवेश में होने का तर्क रखा, जबकि अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता पंकज पाठक ने आरोपी को कठोर दंड देने की मांग की। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि घटना आवेश में हुई है, इसलिए इसे विरल से विरलतम श्रेणी का मामला नहीं माना जा सकता, लेकिन अपराध अत्यंत गंभीर है।
न्यायालय ने आरोपी गोवर्धन पटेल को धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 115(2) के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया।

