अमरपाटन, नरेन्द्र पटेल। साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों को डराकर उनकी जीवनभर की जमा पूंजी हड़पी जा रही है। ऐसा ही एक मामला मैहर जिले के अमरपाटन से सामने आया है, जहां PHE विभाग से रिटायर्ड एक कर्मचारी से साइबर ठगों ने 22 लाख रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


अमरपाटन थाना क्षेत्र के ग्राम इटमा कोठार निवासी मानेंद्र सिंह राठौर, जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) से सेवानिवृत्त हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित के अनुसार 5 मई 2026 को उनके पास एक अज्ञात महिला का फोन आया। महिला ने खुद को दिल्ली से बताते हुए कहा कि सीबीआई के पास उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है।


आरोपियों ने बातचीत के दौरान पीड़ित को विश्वास में लेते हुए यह डर दिखाया कि इस मामले में कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और अब उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। इसके बाद लगातार वॉइस कॉल, वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया। करीब 13 दिनों तक साइबर ठग पीड़ित के संपर्क में रहे और उनकी बैंकिंग व संपत्ति संबंधी जानकारी हासिल कर ली।


शातिर आरोपियों ने पीड़ित और उनकी पत्नी के नाम पर मौजूद चार फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर पूरी राशि एक खाते में जमा करवाई। इसके बाद 19 मई को आरटीजीएस के माध्यम से 22 लाख रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर करा लिए गए। इतना ही नहीं, 23 मई तक आरोपी लगातार संपर्क में रहकर आठ लाख रुपये और मांगते रहे। इसी दौरान पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।


मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की है। शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एक महिला सहित तीन आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों की तलाश की जा रही है।


पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने को दें। पुलिस का कहना है कि एक छोटी सी लापरवाही आपकी वर्षों की मेहनत की कमाई को पलभर में खत्म कर सकती है।