इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार यूके के रोशडेल में हुए ग्रूमिंग गैंग के सरगना की तरह ही वही दावा दोहरा रही है कि वह अब पाकिस्तानी नागरिक नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान रोशडेल में 'ग्रूमिंग गैंग' के मुख्य आरोपियों में से एक शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार कर रहा है। उसका कहना है कि शाबिर अहमद ने अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट फाड़ दिया था और अब वह पाकिस्तान का नागरिक नहीं है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, शबीर अहमद इस हफ्ते 30 नाबालिग लड़कियों से बलात्कार से जुड़े मामलों में 14 साल की सजा काटने के बाद जेल से रिहा हुआ।
पाकिस्तान के अधिकारी और मंत्री कह रहे हैं कि वह अब पाकिस्तान का नागरिक नहीं है। इसी वजह से उसे उसके देश वापस भेजने में रुकावट आ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि, "ब्रिटेन सरकार का मानना है कि पाकिस्तान का उसे वापस लेने से इनकार करना, 1971 के इमिग्रेशन एक्ट की उस कानूनी बाधा से भी बड़ी समस्या है, जो कॉमनवेल्थ नागरिक होने के कारण उसे ब्रिटेन से बाहर भेजने में रोक बन रही है।"
सरकारी सूत्र के हवाले से द टेलीग्राफ ने लिखा, "1971 के इमिग्रेशन एक्ट से जुड़ी समस्या का शायद कोई हल निकल सकता है, लेकिन पाकिस्तान वाला मामला उससे ज्यादा मुश्किल है।"
शबीर अहमद 1960 के दशक के आखिर में पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन आया था और उसके पास दोनों देशों की नागरिकता थी। उसे 2012 में 22 साल की सजा सुनाई गई थी और 2016 में उसका ब्रिटिश पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था ताकि जेल से रिहा होने के बाद उसके निर्वासन (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके। उसके पीड़ितों से वादा किया गया था कि उसे देश से निष्कासित किया जाएगा।
यूके में बच्चों के संगठित यौन शोषण की जांच के लिए निजी तौर पर फंड की गई संसदीय जांच की 219 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार, कई दशकों तक कम से कम 2,50,000 लड़कियों को सामूहिक दुष्कर्म, तस्करी, टॉर्चर और जबरदस्ती गर्भवती किए जाने का शिकार बनाया गया। इसमें ज्यादातर अपराधी पाकिस्तानी मुस्लिम मूल के थे और इसमें मदद करने वाले संस्थान मुख्य रूप से ब्रिटिश सरकार के थे।
यह रिपोर्ट 'सामूहिक दुष्कर्म इन्क्वायरी' नाम की एक निजी फंडिंग से कराई गई संसदीय जांच का हिस्सा है। इसकी अध्यक्षता रिफॉर्म यूके के सांसद रूपर्ट लोव ने की, जबकि इसकी संचालन प्रमुख सर्वाइवर और सामाजिक कार्यकर्ता सैमी वुडहाउस थीं। इस जांच के लिए 20,000 से ज्यादा लोगों ने आर्थिक मदद दी। इस जांच को कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं थे, लेकिन इसमें पीड़ितों, व्हिसलब्लोअर्स, नेताओं और विशेषज्ञों की गवाही कई सार्वजनिक सुनवाई के दौरान शामिल की गई। यह जानकारी अमेरिका स्थित दक्षिण एशियाई टीवी नेटवर्क दीया टीवी की एक रिपोर्ट में दी गई।

