भोपाल। राजधानी भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद नगर निगम एक्शन मोड में आ गया है। कोर्ट के आदेश के बाद निगम ने शहरभर में व्यापक सर्वे शुरू कर दिया है। शुरुआती आकलन के अनुसार, शहर में लगभग 1 लाख ऐसी प्रॉपर्टी चिन्हित की गई हैं, जो आवासीय हैं लेकिन वहां दुकानें, मॉल या अन्य व्यापारिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। निगम 15 सितंबर तक सर्वे पूरा कर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करेगा।
अरेरा कॉलोनी और 10 नंबर मार्केट के रहवासी परेशान
दैनिक भास्कर की पड़ताल के अनुसार, अरेरा कॉलोनी (ई-4) जैसे पॉश आवासीय क्षेत्रों में रहवासी लंबे समय से अनियंत्रित कमर्शियल गतिविधियों के कारण ट्रैफिक जाम, गाड़ियों के शोर और खुलेआम होने वाले न्यूसेंस से परेशान हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि व्यावसायिक इमारतों और दुकानों के कारण मुख्य सड़क से लेकर कॉलोनियों की अंदरूनी सड़कों तक गाड़ियां पार्क कर दी जाती हैं। इससे कई बार रहवासियों को अपने घर के दरवाजे तक खोलना मुश्किल हो जाता है। रहवासियों के मुताबिक, रात 12 बजे तक चाय बार और कैफे चालू रहने से गाड़ियों की आवाज और खुले में स्मोकिंग के कारण इलाके का माहौल प्रभावित हो रहा है। इसके चलते कई परिवार अपने घर खाली कर दूसरी जगहों पर जाने को मजबूर हो गए हैं।
याचिकाकर्ता का पक्ष: नक्शा मकान का पास कराया और बना लिए मॉल
आवासीय भवनों में अवैध निर्माण और व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले रहवासी विवेक त्रिपाठी का आरोप है कि भू-माफियाओं ने नगर निगम के नियमों का जमकर उल्लंघन किया है। वर्ष 2015 के बाद अरेरा कॉलोनी जैसे शांत क्षेत्रों में नक्शा तो रिहाइशी मकान का पास कराया गया, लेकिन मौके पर तीन से चार मंजिला मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़े कर दिए गए। नगर निगम द्वारा समय रहते कार्रवाई न किए जाने के कारण रहवासियों के शांतिपूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए, जिसके बाद उन्हें शीर्ष अदालत की शरण लेनी पड़ी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हाईकोर्ट के स्टे निरस्त
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दुकान संचालकों को दिए गए सभी अंतरिम राहत आदेशों (स्टे) को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण और रिहाइशी मकानों के व्यावसायिक उपयोग के मामलों में कानून का पालन बिना किसी ढिलाई के कराया जाए और इसमें कोई दूसरी समिति या जांच बाधा नहीं बनेगी।
व्यापारियों का पक्ष: मिक्स लैंड यूज नीति लागू करने की मांग
दूसरी ओर, भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज इस मामले में व्यापारियों के समर्थन में सामने आया है। चैंबर के सचिव अजय देवनानी का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत व्यापक स्तर पर बेदखली या सीलिंग की कार्रवाई होती है, तो इसका असर लगभग 5 लाख लोगों के रोजगार और आजीविका पर पड़ेगा। चैंबर ने राज्य सरकार से मांग की है कि भोपाल में जल्द से जल्द नया मास्टर प्लान लागू किया जाए और मुख्य सड़कों तथा प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर 'मिक्स लैंड यूज' (मिश्रित भूमि उपयोग) नीति को मंजूरी दी जाए ताकि रहवासियों और व्यापारियों दोनों को राहत मिल सके।




