हरदा। सरकारी दफ्तरों की चौखट घिसते-घिसते जब एक किसान का सब्र जवाब दे गया, तो उसने विरोध का ऐसा रास्ता चुना कि पूरी कलेक्ट्रेट में चर्चा छिड़ गई। दरअसल हरदा जनसुनवाई के दौरान किसान अशोक राजपूत गले में माला और हाथ में नारियल लेकर कलेक्टर सिद्धार्थ जैन का 'सम्मान' करने पहुँचे। हालांकि कलेक्टर कक्ष में मौजूद नहीं थे, तो किसान ने बड़े ही शांत लेकिन तल्ख अंदाज में माला और नारियल उनकी मेज पर सजा दिए।


किसान अशोक राजपूत का आरोप है कि उनके खेत में अजनई नहर का निर्माण किया गया था। इस अधिग्रहण के बदले उन्हें जो मुआवजा मिलना चाहिए था, उसके लिए वे पिछले दो दशकों से एक विभाग से दूसरे विभाग की फाइलें ढो रहे हैं। किसान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर उन्हें मुआवजा नहीं मिला, तो वे नहर के दोनों ओर के रास्ते बंद कर देंगे। जिस समय किसान यह 'अनूठा प्रदर्शन' कर रहे थे, उस समय संयुक्त कलेक्टर सतीश राय अन्य आवेदकों की सुनवाई कर रहे थे।


इस मामले पर प्रशासनिक गलियारों से अलग ही पक्ष सामने आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला 20 नहीं, बल्कि करीब 30-35 साल पुराना है। नियमानुसार, जब भूमि अधिग्रहण हुआ था, तब दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं, लेकिन उस वक्त किसान ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। अब इतने सालों बाद मुआवजे की मांग करना कानूनी पचड़ों में फंसा हुआ है।


प्रशासनिक सूत्रों ने एक नया खुलासा करते हुए बताया कि उक्त किसान को कुछ महीने पहले ही प्रशासन की ओर से राहत के तौर पर लगभग दो एकड़ जमीन आवंटित की गई है। फिलहाल, संयुक्त कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अब यह जांच का विषय है कि उस समय अधिग्रहण कानूनी दायरे में हुआ था या नहीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि किसान की यह 'गांधीगिरी' रंग लाएगी या मामला फाइलों में ही दबा रहेगा।