साल 2025 की अंतिम एकादशी वैकुंठ एकादशी के रूप में मनाई जाएगी, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह एकादशी पुत्रदा एकादशी भी कहलाती है और इस दिन वैकुंठ द्वार खुलने की मान्यता है। पंचांग के अनुसार, यह 30 दिसंबर 2025 को पड़ रही है (कुछ जगहों पर 31 दिसंबर को भी मनाई जा सकती है)।


इस व्रत से मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है।


पूजा विधि: सुबह स्नान कर विष्णु जी की मूर्ति स्थापित करें, तुलसी पत्र अर्पित करें, फल-फूल चढ़ाएं और 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।


पारण समय: अगले दिन द्वादशी तिथि पर पारण करें। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस एकादशी पर उपवास रखने से सभी पाप नष्ट होते हैं और वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।