छतरपुर, संजय अवस्थी। मध्य प्रदेश के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में बच्चों का भविष्य संवार रहे व्यावसायिक प्रशिक्षकों के सब्र का बांध अब टूट गया है। पिछले 9-10 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे सैकड़ों व्यावसायिक प्रशिक्षकों को बिना किसी लिखित या आधिकारिक आदेश के, महज एक व्हाट्सएप मैसेज के जरिए नौकरी से बाहर कर दिया गया है। इस तानाशाही और भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ गुस्साए प्रशिक्षकों ने छतरपुर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री और शासन के नाम एक शिकायती आवेदन सौंपा है।
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ के प्रतिनिधि भारतेंदु नायक ने प्रशासन और मीडिया के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के शासकीय स्कूलों में स्किल बेस्ड ट्रेनिंग देने वाले इन शिक्षकों के साथ लंबे समय से मानसिक और आर्थिक भेदभाव किया जा रहा है। प्रशिक्षक पिछले 9 से 10 वर्षों से बिना किसी वेतन वृद्धि के एक ही मानदेय पर काम करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद, इस बार भी बिना किसी ठोस कारण या लिखित आदेश के, केवल व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज डालकर उन्हें अचानक सेवाओं से पृथक कर दिया गया।
भारतेंदु नायक ने कहा कि हम स्कूलों में बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और उनका भविष्य सुरक्षित करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन शासन ने हमारा खुद का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है। अचानक नौकरी से निकाले जाने के कारण सैकड़ों परिवारों के सामने भरण-पोषण और जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रशिक्षकों ने जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार से मांग की है कि उनके लिए एक स्थायी और ठोस नीति का निर्धारण किया जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी बहाली और स्थायी नीति को लेकर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।

