भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ग-2 और वर्ग-3 की भर्ती प्रक्रिया में पदवृद्धि की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत को करीब 95 घंटे बाद पुलिस ने धरना स्थल से हटा दिया। नरेंद्र राजपूत के कड़े विरोध और आपत्तियों के बावजूद पुलिस प्रशासन ने स्वास्थ्य सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें एंबुलेंस के जरिए सीधे अस्पताल में भर्ती कराया है। लगातार चार दिनों से जारी भूख हड़ताल के चलते उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी, जिससे प्रशासन पर चिकित्सकीय निगरानी का दबाव बढ़ रहा था।


धरना स्थल पर विरोध, पुलिस ने एंबुलेंस से पहुंचाया अस्पताल

राजधानी भोपाल में शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने और अन्य लंबित मांगों के निराकरण के लिए नरेंद्र राजपूत अनवरत अनशन कर रहे थे। अनशन के 95 घंटे बीत जाने के बाद जब उनके स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई, तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, नरेंद्र राजपूत ने अनशन स्थल छोड़ने से साफ इनकार करते हुए पुलिस कार्रवाई पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने एहतियाती कदम उठाते हुए उन्हें एंबुलेंस में शिफ्ट कर दिया और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।


कांग्रेस नेता ने वीडियो कॉल पर जाना हाल, सरकार से त्वरित निर्णय की अपील

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिक्षक भर्ती के आंदोलित अभ्यर्थियों को विपक्षी दल का भी साथ मिला है। कांग्रेस नेता ने अस्पताल में भर्ती नरेंद्र राजपूत और धरना दे रहे अभ्यर्थियों से वीडियो कॉल के माध्यम से सीधा संपर्क किया और उनकी मांगों व पीड़ा को विस्तार से सुना। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं की बेचैनी, पीड़ा और अनिश्चित भविष्य की चिंता को सरकार को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने अभ्यर्थियों की सभी मांगों का पुरजोर समर्थन करते हुए इस संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने का भरोसा दिलाया।


'युवाओं को सड़क पर उतरने को मजबूर न करे सरकार'

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हस्तक्षेप की अपील करते हुए विपक्षी नेता ने कहा कि युवाओं की जायज आवाज को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को संवेदनशीलता और सकारात्मकता के साथ तत्काल ठोस निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के होनहार युवाओं ने कड़ी मेहनत से परीक्षा पास की और योग्यता साबित की है, अब वे सिर्फ अपने हक का रोजगार मांग रहे हैं। सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के बजाय उनकी उम्मीदों का सम्मान करना चाहिए, ताकि उन्हें अपनी मूलभूत मांगों के लिए सड़कों पर उतरकर भूख हड़ताल न करनी पड़े। नरेंद्र राजपूत को अस्पताल शिफ्ट किए जाने के बाद इस मुद्दे पर प्रदेश का सियासी तापमान और गर्माने के आसार हैं।