श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (आईएफएफजेके) श्रीनगर में आयोजित किया जा रहा है, जहां फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज निर्देशक और लेखक श्रीराम राघवन भी आयोजन में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आयोजन की जमकर सराहना की।

उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि यह समारोह घाटी के साथ बॉलीवुड के रिश्ते को फिर से मजबूत कर सकता है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि समारोह से जम्मू-कश्मीर के लोगों को मनोरंजन जगत में आने के लिए हौसला मिलेगा।

उन्होंने कहा, "अभी फिल्ममेकिंग के हर क्षेत्र में काफी लोगों की जरूरत है और मुझे यकीन है कि इस समारोह से उन लोगों को भी हौसला मिलेगा, जो मनोरंजन जगत में आना चाहते हैं। उन्हें लगेगा कि हां, हम भी कोशिश कर सकते हैं।"

हालांकि, निर्देशक ने यह भी स्पष्ट किया कि समारोह का नतीजा हाल ही में न सही लेकिन कुछ समय के बाद जरूर देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इस समारोह से लोगों को थोड़ी मदद मिलेगी और इसका फर्क तुरंत नहीं लेकिन कुछ सालों में जरूर दिखेगा।"

श्रीराम राघवन का मानना है कि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (आईएफएफजेके) को हिंदी सिनेमा को एक अवसर के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने कहा, "हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को इसे एक अवसर के तौर पर लेना चाहिए, क्योंकि आज हर राज्य का अपना सांस्कृतिक सिनेमा है, बहुत सारी रीजनल फिल्में भी अच्छा कर रही हैं। बहुत कुछ हो रहा है और शायद यहां भी होगा।"

उन्होंने कहा कि समारोह में भीड़ बहुत थी, जिसे देखकर वे काफी खुश नजर आए। उन्होंने क्राउड को लेकर कहा, "यहां पर भारी मात्रा में लोग देखने को मिले, इतना तो मुंबई में भी नहीं देखा होगा। वहां तो 40-50 लोग होते थे और यहां तो पूरा हॉल भरा हुआ था। मैं बस यही चाहता था कि यहां पर और एक दो घंटा कर पाता और मुझे लगा कि मैं यहां पर एक पूरा दिन बिता सकता था।"

जम्मू-कश्मीर का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर 7 सितंबर से 10 सितंबर 2026 तक श्रीनगर में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में इस महोत्सव का उद्घाटन किया। इस फेस्टिवल का मुख्य विषय है- 'रंग-ए-सिनेमा'।