इम्फाल। एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए गुरुवार की शुरुआत शानदार रही। वुशु खिलाड़ी नाओरेम रोशिबिना देवी ने नागोया में 60 किग्रा सांडा इवेंट में सिल्वर मेडल (रजत पदक) जीता है। रोशिबिना की इस उपलब्धि पर मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने बधाई दी है।

मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, "जापान के आइची-नागोया में 2026 के 20वें एशियाई खेलों में महिलाओं की सांडा 60 किग्रा स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर नाओरेम रोशिबिना देवी को बहुत-बहुत बधाई। उनका लगातार तीसरा एशियाई खेल पदक जीतना मणिपुर और भारत के लिए बहुत गर्व की बात है। उम्मीद है कि वह हमारे युवाओं को प्रेरित करती रहेंगी और देश को और गौरव दिलाएंगी।"

सीएमओ मणिपुर ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "सीएम युमनाम खेमचंद सिंह ने जापान के नागोया में 20वें एशियन गेम्स 2026 में वुशु—महिलाओं के सांडा 60 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतने पर नाओरेम रोशिबिना देवी को दिल से बधाई दी है। इस कामयाबी के साथ, रोशिबिना ने लगातार तीन एशियन गेम्स मेडल जीतने वाली पहली भारतीय वुशु एथलीट बनकर इतिहास रच दिया है। जकार्ता 2018 में ब्रॉन्ज, हांगझोऊ 2023 में सिल्वर और आइची-नागोया 2026 में सिल्वर।"

रोशिबिना देवी ने महिलाओं के 60 किग्रा सांडा इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। रोशिबिना को फाइनल में चीन की झांग शियाओयू से 0-2 से हार का सामना करना पड़ा और परिणामस्वरूप उन्हें सिल्वर मेडल (रजत पदक) से संतोष करना पड़ा। झांग ने टाइटल बाउट में दबदबा बनाया और दोनों राउंड 5-0 से जीतकर मुकाबला 10-0 से अपने नाम कर लिया।

रोशिबिना का एशियन गेम्स में यह तीसरा मेडल है। इससे पहले उन्होंने 17 साल की उम्र में 2018 जकार्ता-पालेमबांग गेम्स में ब्रॉन्ज और हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 में रजत पदक जीता था।

25 साल की इस मणिपुरी एथलीट ने वुशु के कॉम्बैट-स्पोर्ट डिसिप्लिन, सांडा के उसी वेट डिवीजन में दूसरी बार सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने पहले क्वार्टर फाइनल में मकाओ की चू मान सिन को 5-0 से हराकर मेडल पक्का किया था। वुशु की सांडा श्रेणी में सेमीफाइनलिस्टों का कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो जाता है। रोशिबिना 2022 में अपने परफॉर्मेंस को बेहतर करना चाहती थीं। उन्होंने इंडोनेशिया की थानिया कुसुमनिंगत्यास को 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई, लेकिन आखिर में गोल्ड मेडल के मुकाबले में चीन की झांग शियाओयू से 0-2 से हार गईं।

रोशिबिना का इरादा इस बार अपने पदक का रंग बदलना था, लेकिन इसमें वह सफल नहीं रहीं। हालांकि, लगातार दूसरे एशियन गेम्स में रजत पदक जीतना उनकी क्षमता को दिखाता है। निश्चित रूप से देश को उनके प्रदर्शन पर गर्व है।