नई दिल्ली। निर्यातकों के लिए कारोबार को और आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एडवांस ऑथराइजेशन (एए) और एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) योजनाओं के तहत एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन डिस्चार्ज सर्टिफिकेट (ईओडीसी) प्राप्त करने के लिए फिजिकल ड्यूटी भुगतान चालान जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, अब कस्टम्स और आइसगेट (आईसीईजीएटीई) से प्राप्त लाइसेंस-आधारित स्वैच्छिक ड्यूटी भुगतान संबंधी डेटा को डीजीएफटी की ऑनलाइन प्रणाली के साथ एकीकृत कर दिया गया है। इससे संबंधित भुगतान की प्रमाणिक जांच सीधे संबंधित प्राधिकरण (ऑथराइजेशन) के साथ डिजिटल रूप से की जा सकेगी।

नई व्यवस्था के तहत 1 अगस्त 2026 या उसके बाद किए गए स्वैच्छिक ड्यूटी भुगतानों के लिए निर्यातकों को ऑथराइजेशन क्लोजर आवेदन के साथ फिजिकल चालान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

डीजीएफटी ने बताया कि भुगतान से जुड़ी प्रमाणित जानकारी अब निर्यातकों को डीजीएफटी ग्राहक पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इससे वे आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि भुगतान सही ऑथराइजेशन के साथ मैप हुआ है या नहीं।

इसी तरह, यही प्रमाणित भुगतान रिकॉर्ड डीजीएफटी के क्षेत्रीय कार्यालयों को भी उनके बैक-ऑफिस सिस्टम पर उपलब्ध रहेगा, जिससे भुगतान विवरण की मैन्युअल जांच की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और आवेदन प्रक्रिया तेज होगी।

मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से आवेदन निपटान में लगने वाला समय कम होगा, अनावश्यक पत्राचार घटेगा और विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं समान होगी।

यह डिजिटल सुविधा डीजीएफटी और आईसीईजीएटीई के बीच एपीआई-आधारित डेटा एक्सचेंज सिस्टम के माध्यम से लागू की गई है, जिसके तहत कस्टम्स सिस्टम से ड्यूटी भुगतान संबंधी जानकारी सीधे डीजीएफटी के ईओडीसी प्रोसेसिंग वर्कफ्लो में भेजी जाएगी।

सरकार का मानना है कि मैन्युअल दस्तावेज जमा करने और उसकी जांच की जगह प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड अपनाने से प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बनेगी। साथ ही मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और डेटा त्रुटियों की संभावना भी घटेगी।

इस कदम से निर्यातकों के अनुपालन का बोझ और लेनदेन लागत दोनों कम होने की उम्मीद है। विशेष रूप से एमएसएमई निर्यातकों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा, जो अक्सर अपने स्तर पर ही ऑथराइजेशन क्लोजर से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करते हैं।

डीजीएफटी ने इस संबंध में 5 अगस्त 2026 को एक ट्रेड नोटिस भी जारी किया है, ताकि निर्यातकों और अन्य हितधारकों को नई व्यवस्था की जानकारी दी जा सके।

गौरतलब है कि एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत निर्यात उत्पादों में उपयोग होने वाले कच्चे माल को शुल्क-मुक्त आयात करने की अनुमति दी जाती है। वहीं ईपीसीजी योजना के अंतर्गत निर्यात दायित्व के बदले पूंजीगत वस्तुओं का आयात रियायती या शून्य सीमा शुल्क पर किया जा सकता है।

यदि निर्यात दायित्व पूरी तरह पूरा नहीं हो पाता, तो अधिकृत धारक बचाए गए सीमा शुल्क के अनुपात में शुल्क और ब्याज का भुगतान कर मामले को नियमित करता है तथा इसके बाद ईओडीसी के लिए आवेदन करता है। पहले ऐसे भुगतान का प्रमाण फिजिकल रूप में जमा करना पड़ता था और उसका सत्यापन मैन्युअल रूप से किया जाता था।

सरकार का कहना है कि यह पहल व्यापार सुविधा के लिए चलाए जा रहे व्यापक डिजिटल परिवर्तन कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका उद्देश्य अधिक कुशल, पारदर्शी और भरोसेमंद नियामकीय वातावरण तैयार करना है, ताकि निर्यातक कागजी प्रक्रियाओं के बजाय अपने व्यापार विस्तार और वृद्धि पर अधिक ध्यान दे सकें।