भिंड। हौसलों में अगर जान हो तो आर्थिक तंगी और लगातार मिलने वाली असफलताएं भी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकतीं। इसे सच कर दिखाया है भिंड जिले की लहार तहसील के छोटे से गांव रावतपुरा खुर्द के रहने वाले किसान पुत्र पवन कुमार तिवारी ने। सीमित संसाधनों और आर्थिक संघर्षों के बीच दिन-रात एक कर पवन ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) परीक्षा-2024 में पूरे प्रदेश में 7वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ईडब्ल्यूएस (EWS) वर्ग में वे मध्य प्रदेश के टॉपर बने हैं। उनका चयन उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) पद पर हुआ है।


'रिश्तेदारों से कर्ज लेकर भेजा था इंदौर': भावुक हुए किसान पिता

पवन की इस ऐतिहासिक सफलता पर पिता सत्येंद्र कुमार तिवारी बेहद भावुक हैं। उन्होंने बताया कि परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि बेटे को किसी बड़े शहर भेजकर तैयारी कराई जा सके। पवन का सपना प्रशासनिक सेवा और उच्च शिक्षा में जाने का था। बेटे के सपनों को पंख देने के लिए उन्होंने रिश्तेदारों और परिचितों से पैसे उधार लिए और उसे इंदौर भेजा। आज जब बेटे का चयन राजपत्रित पद पर हुआ है, तो पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। पूरे रावतपुरा खुर्द गांव में जश्न का माहौल है।


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सरकारी स्कूल से असिस्टेंट प्रोफेसर तक का सफर, कई बार मिली नाकामी

पवन की शुरुआती शिक्षा लहार के सरकारी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने शासकीय महाविद्यालय लहार से बीएससी की डिग्री पूरी की। आगे चलकर उन्होंने ग्वालियर के डॉ. भगवत सहाय शासकीय महाविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (MA) किया और वर्ष 2019 से पूरी शिद्दत के साथ सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए।

उनका यह सफर कांटों भरा रहा:

  • 2020 की राज्य सेवा परीक्षा: पहले ही प्रयास में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन 87-13 फॉर्मूले के कानूनी फेर में परिणाम अटकने के कारण चयन से चूक गए।
  • 2021 और 2022 की परीक्षाएं: लगातार दो प्रयासों में मुख्य परीक्षा में असफलता हाथ लगी।
  • पहला असिस्टेंट प्रोफेसर प्रयास: लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद अंतिम मेरिट सूची में नाम वेटिंग लिस्ट में अटक गया।


चेन्नई में 9 घंटे की नौकरी, खुद खाना बनाकर रात 4 बजे तक की पढ़ाई

असफलताओं से टूटने के बजाय पवन ने अपनी मेहनत दोगुनी कर दी। इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) उत्तीर्ण की और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के माध्यम से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) में चयन पाकर पहली सरकारी नौकरी हासिल की।

उनकी पोस्टिंग चेन्नई में हुई, जहां वे सुबह 9 से शाम 6 बजे तक ड्यूटी करते थे। अजनबी शहर में रहने, दफ्तर से लौटने के बाद खुद खाना बनाने और तमाम दैनिक कार्यों के बाद वे रात 3 से 4 बजे तक पढ़ाई में जुटे रहते थे। अगली सुबह फिर ड्यूटी जाना होता था, लेकिन उनके जेहन में हमेशा असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना तैरता रहा।


कई सरकारी नौकरियों में चयन, आखिरकार हासिल की 7वीं रैंक

पवन की मेहनत का नतीजा रहा कि उनका चयन मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) के जरिए गजरा राजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर में मेडिकल सोशल वर्कर के पद पर हुआ। इसके बाद दिल्ली सरकार में वेलफेयर ऑफिसर के पद पर भी वे चयनित हुए।

हालांकि, उनका अंतिम ध्येय उच्च शिक्षा विभाग में प्राध्यापक बनना था। उन्होंने MPPSC सहायक प्राध्यापक परीक्षा-2024 के लिए पूरी ताकत झोंक दी। हाल ही में घोषित चयन परिणाम में पवन ने संपूर्ण मध्य प्रदेश में 7वीं रैंक और EWS श्रेणी में पहली रैंक हासिल कर अपने वर्षों के संघर्ष को स्वर्णिम सफलता में बदल दिया।

"बेटे की लगन देखकर मैंने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर उसे इंदौर भेजा था। आज उसने मेरी मेहनत और गांव का मान बढ़ाया है। एक किसान पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है।"

— सत्येंद्र कुमार तिवारी, पवन के पिता