भोपाल। चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रियाओं पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा खड़े किए जा रहे सवालों पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोरदार पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 'नाच न जाने आंगन टेढ़ा' की तर्ज पर कांग्रेस अपनी हर चुनावी हार का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ती है। डॉ. यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में माफी मांग चुके राहुल गांधी को संवैधानिक मर्यादाओं का तकाजा समझते हुए नेता प्रतिपक्ष के पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं भाजपा नेतृत्व ने कहा कि राहुल गांधी की यह बयानबाजी भाजपा विरोध नहीं, बल्कि देश विरोध जैसी स्थिति पैदा करती है।


'गांधी परिवार को व्यवस्थाओं पर भरोसा नहीं, इमरजेंसी का दोहराया जा रहा दौर': सीएम

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे युवा लोकतंत्र है, लेकिन पांच पीढ़ियों से केंद्रीय सत्ता के इर्द-गिर्द रहने वाले गांधी परिवार का स्वभाव ऐसा हो गया है कि वे किसी भी संवैधानिक व्यवस्था को स्वीकार नहीं करना चाहते। मुख्यमंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जब इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला इंदिरा गांधी के खिलाफ आया था, तब पूरे देश पर इमरजेंसी थोप दी गई थी। आज राहुल गांधी भी ठीक उसी मानसिकता के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास जता रहे हैं। किसी भी संस्था को गाली दे देना, अनर्गल आरोप लगा देना और सनसनी फैलाना कांग्रेस का स्थायी चरित्र बन चुका है, जिसे देश का लोकतंत्र कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।


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'जहां जीते वहां SIR ठीक, हारे तो आपत्ति; मीठा-मीठा गप्प नहीं चलेगा': डॉ. मोहन यादव

चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) पर लिए गए सर्वसम्मत निर्णय का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहरे मापदंडों पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में जब SIR की प्रक्रिया हुई और वहां कांग्रेस व उनके सहयोगियों की सरकारें बनीं, तब उन्हें चुनाव आयोग या मतदाता सूची से कोई शिकायत नहीं थी। डॉ. यादव ने तंज कसते हुए कहा कि 'मीठा-मीठा गप्प और कड़वा-कड़वा थू' की राजनीति अब नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश और आसपास के देशों में जिस प्रकार के हालात हैं, उसे देखते हुए देश के जिम्मेदार नेता प्रतिपक्ष को बेहद संयम और गंभीरता से बोलना चाहिए। इससे पहले भी 'चौकीदार चोर है' कहकर वे सुप्रीम कोर्ट में माफी मांग चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को अपने 'राजकुमार' को समझाना चाहिए कि बिना सत्ता के रहने की आदत डालें और देश में भ्रम फैलाना बंद करें।


'बिना दस्तावेजों के भ्रम फैलाना राहुल को महंगा पड़ेगा': हेमंत खंडेलवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए SIR और Form-6 डिक्लेरेशन को लेकर जनता में लगातार झूठी भ्रांतियां पैदा कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने पहले ही साफ कर दिया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सर्वसम्मति से तय की गई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का इतिहास ही अराजक राजनीति का रहा है—चाहे सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाना हो, न्यायपालिका की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा करना हो, विदेशों में जाकर भारत को बदनाम करना हो या फिर EVM को 'ब्लैक बॉक्स' और केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED) को ठगबंधन कहना हो। बिना किसी ठोस साक्ष्य और दस्तावेज के संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा को तार-तार करना अब राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से बहुत भारी पड़ेगा, क्योंकि देश की जनता अब उनके बयानों को गंभीरता से लेना छोड़ चुकी है।