छत्तीसगढ़/रायगढ़ (रोहित तिर्की)। जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में संचालित लैलूंगा संयुक्त एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में गुरुवार को विद्यार्थियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। विद्यालय परिसर में कथित अव्यवस्थाओं तथा भोजन की गुणवत्ता को लेकर नाराज छात्र-छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार करते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने प्राचार्य को हटाने की मांग भी की।
लंबे समय से शिकायतों का दावा
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया। विद्यार्थियों के अनुसार, जब उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तब उन्होंने विरोध स्वरूप कक्षाओं का बहिष्कार किया।
भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि विद्यालय की मेस में परोसे जाने वाले भोजन में कई बार कीड़े तथा कांच के टुकड़े मिलने जैसी घटनाएं हुई हैं। उनका यह भी कहना है कि अधिकारियों के निरीक्षण अथवा दौरे के समय व्यवस्थाओं को बेहतर दिखाया जाता है, जबकि सामान्य दिनों में भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रहती।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय के प्राचार्य कई बार लगातार अनुपस्थित रहते हैं, जिससे शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। साथ ही, छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती।
विभाग का पक्ष
संबंधित विभाग के अधिकारी श्रीकांत दुबे ने बताया कि आवासीय विद्यालयों में समय-समय पर कुछ समस्याएं सामने आती रहती हैं। उनके अनुसार निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां पाई गई हैं, जिन्हें दूर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस का जवाब तथा विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच की आवश्यकता
इस पूरे घटनाक्रम ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं। एक ओर छात्र भोजन की गुणवत्ता और विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। ऐसे में निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यपरक जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
यदि जांच में छात्रों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह आवासीय विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता, छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी से जुड़ा गंभीर मामला होगा। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक होगा कि ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और संवाद में कहां कमी रही।




