नई दिल्ली। महिलाओं के जीवन में उम्र के साथ कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। इनमें से एक है मेनोपॉज, यानी वह अवस्था जब महिला के पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं। आमतौर पर यह बदलाव 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है। हालांकि, मेनोपॉज़ की शुरुआत से पहले ही शरीर में कई तरह के संकेत दिखाई देने लगते हैं। कभी अचानक बहुत गर्मी लगना, तो कभी ठंड महसूस होना, रात में बार-बार नींद खुलना और दिनभर थकान बने रहना भी इन्हीं लक्षणों में शामिल हो सकते हैं।क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि रात को अचानक गर्मी लगने लगती है और आप कंबल हटा देती हैं? कुछ देर बाद ठंड महसूस होती है और फिर कंबल ओढ़ना पड़ता है। अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसकी एक वजह मेनोपॉज से जुड़े हॉट फ्लैश और रात में पसीना आना हो सकता है।

मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बदलता है। इसका असर शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अचानक गर्मी महसूस होना, पसीना आना और नींद का टूटना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। रात में नींद पूरी न होने के कारण अगले दिन थकान, सुस्ती और चिड़चिड़ापन भी महसूस हो सकता है।

अगर रात में पर्याप्त नींद लेने के बाद भी आप दिनभर थका हुआ महसूस करती हैं, तो इसे हमेशा सामान्य थकान समझकर टालना ठीक नहीं है। मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव और नींद की परेशानी ऊर्जा के स्तर को प्रभावित कर सकती है।

कुछ महिलाओं को इस दौरान चीजें याद रखने, ध्यान लगाने और स्पष्ट सोचने में भी परेशानी होती है। इसे आम भाषा में ब्रेन फॉग कहा जाता है। इसके अलावा मूड में बदलाव, बेचैनी और चिड़चिड़ापन भी हो सकता है।

हालांकि, ये सभी लक्षण केवल मेनोपॉज के कारण ही हों, ऐसा जरूरी नहीं है। थायरॉइड की समस्या, खून की कमी, तनाव और नींद से जुड़ी दूसरी परेशानियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।

इस अवस्था में कुछ छोटी-छोटी आदतें राहत देने में मदद कर सकती हैं। रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। हल्के कपड़े पहनें और जरूरत के मुताबिक बिस्तर पर हल्की चादर या कंबल रखें। संतुलित भोजन करें और पर्याप्त पानी पिएं। नियमित टहलना और हल्का व्यायाम ऊर्जा व मूड को बेहतर रखने में मदद कर सकता है।

अगर नींद लगातार खराब हो रही है, थकान रोजमर्रा के कामों को प्रभावित कर रही है या मूड में काफी बदलाव आ रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर लक्षणों और जरूरत के अनुसार अन्य संभावित कारणों की जांच कर सकते हैं और उचित उपचार सुझा सकते हैं।