लंदन। इंग्लैंड के ज्यादातर हिस्सों में एम्बर हीट-हेल्थ अलर्ट जारी किया गया है। यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (यूकेएचएसए) के अनुसार 11 अगस्त मंगलवार सुबह 9 बजे से 14 अगस्त शुक्रवार रात 9 बजे तक यॉर्कशायर एंड द हंबर, वेस्ट मिडलैंड्स, ईस्ट मिडलैंड्स, ईस्ट ऑफ इंग्लैंड, साउथ ईस्ट, लंदन, साउथ वेस्ट और नॉर्थ वेस्ट क्षेत्रों में एम्बर हीट-हेल्थ अलर्ट लागू रहेगा।

वहीं, नॉर्थ ईस्ट इंग्लैंड में इसी अवधि के दौरान येलो अलर्ट रहेगा। यूकेएचएसए की कार्यवाहक पब्लिक हेल्थ कंसल्टेंट पॉली एशमोर ने लोगों से गर्मी के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, दिन के सबसे गर्म समय में धूप से बचना और घर के अंदर का तापमान ठंडा रखने जैसे आसान उपाय लोगों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों के लिए गर्म मौसम गंभीर स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं।

यूकेएचएसए ने स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल सेवाओं से भी गर्मी की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे अपने बुजुर्ग और अन्य संवेदनशील परिजनों, दोस्तों का हालचाल लेते रहें और सुनिश्चित करें कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों और जरूरी सावधानियों से अवगत हैं।

यूके में भीषण गर्मी जारी रहने की वजह से ज्यादातर इलाकों में सूखे की आशंका जताई गई है। मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि सोमवार का दिन ठंडा रहा लेकिन हफ्ते के आखिर में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है, और गुरुवार को गर्मी पीक (उच्चतम स्तर) पर रहेगी।

नेशनल ड्राउट ग्रुप ने सोमवार को एक बैठक की। इसमें मंत्री, सरकारी अफसर और वॉटर कंपनियों ने गहन चर्चा की। उन्हें आशंका है कि इंग्लैंड के कई इलाके सूखे का शिकार हो सकते हैं। ग्रुप के अनुसार, आधा इंग्लैंड और पूरा वेल्स सूखे की मार झेल रहा है। नदियों-तालाब का पानी कम हो रहा है और किसानों को भी फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है।

डाउनिंग स्ट्रीट ने हीटवेव और जंगल की आग पर बयान जारी किया। पीएम कार्यालय के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार सरकार जानती है कि जंगल की आग और हीट वेव से देश को कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर पूरे समुदाय, किसानों और कारोबार पर पड़ रहा है। हमने नेशनल ड्राउट ग्रुप के साथ मिलकर जल संचयन और प्राकृतिक आपदा से कैसे बचा जाए इस पर विचार किया। नए जलाशय बनाने के साथ ही वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने को लेकर गंभीर मंत्रणा की।