भोपाल। भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ोतरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद मध्य प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने डॉक्टरों पर वॉटर कैनन और कथित लाठीचार्ज के इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संवाद स्थापित करने के बजाय “लाठी-डंडे की भाषा” पर उतर आई है।


'राजहठ छोड़े सरकार, संवाद से निकाले हल'

कमलनाथ ने सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा: अपने हक और जायज स्टाइपेंड की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे भावी डॉक्टरों पर पुलिसिया कार्रवाई बेहद शर्मनाक है। पिछले एक महीने में स्कूली बच्चों, शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों, किसानों, व्यापारियों और अब डॉक्टरों को सड़कों पर उतरना पड़ा है, जो सरकार की विफलता को दर्शाता है। कमलनाथ ने मांग की है कि सरकार अपना "राजहठ" छोड़े और डॉक्टरों से बातचीत कर तुरंत समाधान निकाले, ताकि आम मरीजों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।


क्या है इंटर्न डॉक्टरों का विवाद?

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) समेत प्रदेशभर के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर अपना मौजूदा स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। 7 सितंबर को सीएम हाउस की ओर मार्च कर रहे डॉक्टरों को पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर रोका था, जहां विवाद के बाद वॉटर कैनन और लाठीचार्ज हुआ। इस कार्रवाई के विरोध में 8 सितंबर को आंदोलन और उग्र हो गया तथा डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल समेत प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी (OPD) व निर्धारित ओटी (OT) सेवाओं का बहिष्कार कर दिया। हालांकि, राहत की बात यह है कि मरीजों के लिए आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं अभी भी जारी रखी गई हैं।