वाशिंगटन। विदेशों में चल रहे ऑनलाइन ठगी केंद्रों की वजह से हर साल अमेरिकियों को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है, जबकि मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अंतरराष्ट्रीय अपराध भी बढ़ रहे हैं। म्यांमार, कंबोडिया और लाओस में सक्रिय कई स्कैम नेटवर्क के पीछे चीनी मूल के गिरोह हैं, जो लोगों को नौकरी का झांसा देकर बुलाते हैं। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और कई लोगों को यातनाएं देकर ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है।अमेरिका ने इन नेटवर्कों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च में एक आदेश जारी कर संबंधित विभागों को इन गिरोहों की पहचान कर उन्हें खत्म करने की योजना बनाने को कहा था। इसके अलावा साइबर अपराध से जुड़े लोगों पर वीजा प्रतिबंध लगाए गए हैं और 13 देशों का एक अंतरराष्ट्रीय समूह भी बनाया गया है, जो मिलकर इन स्कैम नेटवर्कों पर कार्रवाई करेगा। यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों ने सीनेट की विदेश संबंध समिति को दी है।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ये नेटवर्क अब इतने बड़े हो चुके हैं कि इनके पास अपना ढांचा, कर्मचारी और कामकाज का पूरा सिस्टम है। 2025 में अमेरिकी नागरिकों को ऐसे स्कैम से करीब 12.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, हालांकि वास्तविक नुकसान इससे भी ज्यादा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि 2025 में अमेरिकी नागरिकों को हुआ नुकसान 2023 की तुलना में तीन गुना अधिक था और अमेरिका के सभी 50 राज्यों के लोग इन ठगी नेटवर्कों के निशाने पर रहे। वहीं, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों को पिछले वर्ष इन गिरोहों से 114 अरब डॉलर तक का नुकसान होने का अनुमान है।
विदेश विभाग में सहायक सचिव माइकल डीसॉम्ब्रे ने कहा, "म्यांमार, कंबोडिया और लाओस में अपराध से जुड़े स्कैम ऑपरेशन औद्योगिक स्तर तक पहुंच चुके हैं। जो गतिविधियां कभी छोटे स्तर के धोखाधड़ी गिरोहों तक सीमित थीं, वे अब अपने बुनियादी ढांचे, कार्यबल और आपूर्ति शृंखला वाली विशाल अवैध अर्थव्यवस्था में विकसित हो चुकी हैं। विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, दर्जनों देशों के लाखों लोगों को तस्करी के जरिए इन केंद्रों में लाया गया है और काम करने के लिए मजबूर किया गया है।
विदेश विभाग के उप सहायक सचिव डेविड बेडार्ड ने बताया कि ये नेटवर्क अब दक्षिण एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में भी फैल रहे हैं। पहचान से बचने के लिए वे बड़े परिसरों की जगह होटल और रिहायशी इमारतों का इस्तेमाल करने लगे हैं।
बेडार्ड ने कहा, इन संगठनों की संरचना कई स्तरों वाली होती है, जिसमें आपराधिक सरगना, प्रबंधक और स्कैम कर्मचारी शामिल होते हैं। इसके अलावा कुछ भ्रष्ट अधिकारी, वकील, अकाउंटेंट, बैंकर और क्रिप्टोकरेंसी कन्वर्टर भी इनके संचालन में मदद करते हैं।
बेडार्ड ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में धोखाधड़ी के नए रूप सामने आ रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "भारतीय कॉल सेंटर स्कैम, जमैका की लॉटरी ठगी और कार्टेल से जुड़े टाइमशेयर स्कैम जैसे कई मॉडल सामने आए हैं।" अमेरिका को श्रीलंका में उभर रहे स्कैम केंद्रों को लेकर भी चिंता है।
समिति के अध्यक्ष जिम रिश ने कहा कि अब पूरे के पूरे शहर अमेरिकी नागरिकों को ठगने के लिए समर्पित हो गए हैं। उनके अनुसार, ये नेटवर्क अवैध मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी को भी बढ़ावा देते हैं।
डीसॉम्ब्रे ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों का मुद्दा उठाया है। अमेरिका ने बीजिंग से आग्रह किया है कि वह यह साबित करे कि वह इन अपराधों को संरक्षण नहीं दे रहा है और चीनी अपराध सरगनाओं को अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही के दायरे में आने दे।




