गांधीनगर। राज्य सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने बुधवार को बताया कि गुजरात का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व इस साल सितंबर में सालाना आधार पर 35 प्रतिशत बढ़कर 8,167 करोड़ रुपए हो गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 6,050 करोड़ रुपए था। यह वृद्धि तब हुई है जब जीएसटी दरों में कटौती की गई थी।राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वघानी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि इसी अवधि के दौरान 14.7 प्रतिशत की राष्ट्रीय जीएसटी राजस्व वृद्धि दर से दोगुनी से भी अधिक रही।
चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों (अप्रैल से सितंबर) के दौरान, गुजरात ने जीएसटी से 49,858 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में प्राप्त 38,540 करोड़ रुपए की तुलना में 29 प्रतिशत की वृद्धि है।
राज्य सरकार ने इस वृद्धि का श्रेय गुजरात के व्यावसायिक और औद्योगिक माहौल और करदाताओं द्वारा स्वेच्छा से नियमों का पालन करने (वॉलंटरी कंप्लायंस) को दिया है। सितंबर में राज्य कर विभाग के राजस्व में जीएसटी का योगदान सबसे अधिक रहा।
अन्य करों से प्राप्त संग्रह में वैल्यू एडेड टैक्स (वीएटी) से 2,930 करोड़ रुपए, बिजली शुल्क (इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी) से 1,102 करोड़ रुपए और पेशेवर कर (प्रोफेशनल टैक्स) से 24 करोड़ रुपए शामिल हैं।
वघानी ने कहा, "सितंबर के दौरान जीएसटी, वीएटी, बिजली शुल्क और पेशेवर कर को मिलाकर राज्य कर विभाग को कुल 12,222 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।"
ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब जीएसटी दरों में कटौती की गई है, लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि इससे राजस्व वृद्धि पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है।
सरकार ने इस वृद्धि के पीछे व्यावसायिक माहौल और करदाताओं के सहयोग को मुख्य कारण बताया है।
सितंबर का संग्रह और छह महीने के आंकड़े गुजरात के जीएसटी राजस्व में सालाना वृद्धि को दर्शाते हैं। सितंबर के महीने में राज्य की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है।
राज्य सरकार ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों और करदाताओं द्वारा स्वेच्छा से नियमों का पालन करने से गुजरात के आर्थिक विकास में मदद मिल रही है।

















