चित्रकूट। बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात आए भीषण आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई है। मानिकपुर आदर्श रेलवे कॉलोनी स्थित भोलेनाथ मंदिर के समीप इस प्राकृतिक आपदा के कारण एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया। यहाँ चक्रवाती तूफान के चलते एक विशालकाय पेड़ की डाल टूटकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से उस पर बैठे लगभग 500 तोतों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक तोते गंभीर रूप से घायल हो गए। इस सामूहिक पक्षी हादसे से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
60 से 90 किमी की रफ्तार से आई आंधी, उड़ने का मौका भी नहीं मिला
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात करीब 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चक्रवाती आंधी और मूसलाधार बारिश शुरू हुई थी। इस आसमानी आफत और तेज बौछारों से बचने के लिए आसपास के लगभग 1,000 तोते इस विशालकाय पेड़ पर आकर बैठ गए थे। रात के सन्नाटे में जब तूफान का दबाव चरम पर पहुंचा, तो पेड़ की एक भारी-भरकम डाल अचानक टूटकर नीचे आ गिरी। हवा का वेग इतना तीव्र था और डाल इतनी भारी थी कि तोतों को उड़ने का मौका ही नहीं मिला और वे नीचे दब गए।
सुबह का मंजर देख दहल गए लोग, युवाओं ने संभाला मोर्चा
शुक्रवार सुबह जब रेलवे कॉलोनी के रहवासी घरों से बाहर निकले, तो भोलेनाथ मंदिर के पास का नजारा देखकर दंग रह गए। चारों तरफ तोतों के निष्प्राण शरीर बिखरे पड़े थे, जबकि सैकड़ों घायल पक्षी दर्द से तड़प रहे थे। घटना की खबर जंगल की आग की तरह फैली और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। "हमने अपने जीवन में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बेजुबान पक्षियों की मौत का ऐसा भयावह दृश्य देखा है। दिल दहल उठा था।"
- स्थानीय निवासी, मानिकपुर
संकट के इस समय में स्थानीय युवाओं ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। अनमोल केशरवानी, अंकुश, मोंटी गुजर समेत कई युवाओं ने मिलकर सबसे पहले मृत तोतों को एकत्र किया और पूरे सम्मान के साथ गड्ढा खोदकर उन्हें दफनाया।
घरों में घायल तोतों का इलाज कर रहे रहवासी
हादसे के बाद वन्यजीव प्रेमियों और आम नागरिकों ने घायल तोतों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अनेक लोग घायल तोतों को प्राथमिक उपचार देने के लिए अपने-अपने घर ले गए हैं, जहाँ उन्हें दाना-पानी देकर उनकी देखभाल की जा रही है। गौरतलब है कि इस भीषण आंधी का असर पूरे मानिकपुर और आसपास के इलाकों में देखा गया है। दर्जनों स्थानों पर विशाल पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए हैं, जिससे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था भी पूरी तरह ठप हो गई है। बिजली कंपनी और प्रशासनिक अमला सड़कों से पेड़ हटाकर व्यवस्था बहाल करने में जुटा हुआ है।

