छतरपुर। छतरपुर जिला कलेक्टर मृणाल मीना ने कलेक्ट्रेट सभागार में राजस्व अधिकारियों के कामकाज की गहन समीक्षा बैठक ली। बैठक में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अभिलेख दुरुस्ती जैसे बुनियादी राजस्व मामलों के लंबे समय से लंबित रहने पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अख्तियार किया। एडीएम विनय द्विवेदी, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, सभी एसडीएम, एसएलआर, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में कलेक्टर ने दो टूक निर्देश दिए कि राजस्व अधिकारी अपने कोर्ट में नियमित रूप से बैठें और प्रकरणों का समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित करें।


"जो कोर्ट चलाना जानते हैं वही चलाएं": 10 तहसीलों को तीन माह का अल्टीमेटम

बक्सवाहा, घुवारा, छतरपुर, ईशानगर, ज्यौराहा, लवकुशनगर, महेबा, बृजपुरा, महाराजपुर और नौगांव में न्यायालयीन प्रकरणों का भारी बैकलाग पाए जाने पर कलेक्टर ने तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने अविवादित नामांतरण प्रकरणों को जानबूझकर रोके रखने की प्रवृत्ति पर फटकार लगाते हुए कहा कि जो कोर्ट चलाना जानते हैं, वही कोर्ट चलाएं। कलेक्टर ने सभी तहसीलदारों और एसडीएम को तीन महीने का सख्त अल्टीमेटम देते हुए तहसील स्तर पर अविवादित प्रकरणों की पेंडेंसी को शून्य करने के आदेश दिए।


नौगांव-महाराजपुर तहसीलदार की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश, नगर तहसीलदार को नोटिस

राजस्व प्रकरणों में बेहद सुस्त प्रगति और लापरवाही पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने महाराजपुर और नौगांव के तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा उनकी एक-एक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) रोकने के निर्देश दिए। वहीं, डायवर्जन के लंबित मामलों और रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण छतरपुर नगर में प्रगति महज 18 प्रतिशत पाए जाने पर कलेक्टर ने छतरपुर नगर तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर मूल रेवेन्यू वर्क पर फोकस करने की सख्त हिदायत दी। बकस्वाहा तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार की भी न्यूनतम प्रगति पर एसडीएम को दंडात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि लापरवाह अधिकारियों को जारी सभी नोटिस उनकी सेवा नस्तियों (सर्विस बुक) में अनिवार्य रूप से संधारित किए जाएं।


साइबर तहसील के नामांतरण में पटवारियों की निगेटिव रिपोर्ट की होगी जांच

कलेक्टर ने साइबर तहसील के अंतर्गत आने वाले नामांतरण प्रकरणों में पटवारियों द्वारा लगाई जाने वाली निगेटिव रिपोर्ट को गंभीरता से लिया। उन्होंने तहसीलदारों को निर्देश दिए कि वे ऐसी रिपोर्टों को मूल अभिलेखों से क्रॉस-चेक करें। यदि किसी पटवारी द्वारा दुर्भावनापूर्ण या गलत नीयत से नकारात्मक रिपोर्ट लगाना पाया गया, तो संबंधित पटवारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।


बंधक जमीन से अवैध छेड़छाड़ पर आपराधिक केस

बैठक में कलेक्टर ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर बंधक जमीन को बिना तय विधिक प्रक्रिया का पालन किए अवैध तरीके से बंधक-मुक्त किया गया, तो सीधे आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कराया जाएगा। इसके साथ ही आरबीसी 6-4 (प्राकृतिक आपदा राहत) के प्रकरण लंबित रखने पर बड़ामलहरा, बकस्वाहा और सटई के तहसीलदारों को फटकार लगाते हुए तत्काल राहत राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने एसडीएम को निर्देश दिया कि प्राकृतिक आपदा और मुआवजा वितरण में लापरवाही बरतने वाले तहसील बाबुओं (क्लर्कों) की भूमिका की जांच की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव भेजा जाए।


स्वामित्व, ई-केवाईसी और सीएम हेल्पलाइन पर भी कड़े निर्देश

समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने तरमीम कार्य को प्राथमिकता देने, फार्मर रजिस्ट्री का शत-प्रतिशत सत्यापन कराने, भू-अभिलेखों की आधार लिंकिंग, पीएम किसान सम्मान निधि की लंबित ई-केवाईसी पूर्ण कराने और स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों से मकानों की रजिस्ट्री के ऑनलाइन आवेदन भरवाने के निर्देश दिए। साथ ही फसल क्षति व अतिवृष्टि के वास्तविक नुकसान के आकलन के आधार पर त्वरित मुआवजा स्वीकृत करने और सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का शिकायतकर्ताओं से संवाद कर शत-प्रतिशत संतुष्टिपूर्वक निराकरण करने के आदेश दिए।