छतरपुर। बुंदेलखंड के ऐतिहासिक अंचल छतरपुर में राजा-महाराजाओं के दौर का गड़ा हुआ धन तलाशने का एक बड़ा मामला सामने आया है। छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र की चंद्रनगर रेंज अंतर्गत मनियागढ़ की पहाड़ी पर स्थित आल्हा-ऊदल के प्राचीन किले के खंडहरों में 8 बदमाश गुप्त खजाना खोदने पहुंचे थे। घने जंगलों के बीच चल रही इस अवैध खुदाई की भनक जैसे ही चंद्रनगर वन चौकी के अमले को लगी, वन विभाग की टीम ने तत्काल रणनीति बनाकर पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और मौके से 4 आरोपियों को रंगे हाथों धर दबोचा। हालांकि, घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर 4 अन्य आरोपी भागने में सफल रहे।


हाई-टेक मेटल डिटेक्टर लेकर पहुंचे थे आरोपी

चंद्रनगर वन परिक्षेत्र के रेंजर रामप्रसाद प्रजापति ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मनियागढ़ की पहाड़ी का इतिहास बेहद प्राचीन और समृद्ध है। महादेव घाट के समीप आज भी आल्हा-ऊदल कालीन ऐतिहासिक किले के अवशेष और खंडहर मौजूद हैं। लोक मान्यताओं के आधार पर कि इन प्राचीन गढ़ी-किलों में रियासतकालीन धन-दौलत दबी हो सकती है, यह गिरोह आधुनिक मेटल डिटेक्टर मशीनों, लोहे के औजारों और खुदाई के उपकरणों के साथ संरक्षित वन क्षेत्र में दाखिल हुआ था। जब टीम ने दबिश दी, तब आरोपी जमीन में मेटल डिटेक्टर से संकेत लेकर तेजी से गड्ढे खोद रहे थे।


यूपी के बांदा से जुड़े तार, अंतरराज्यीय गिरोह के तौर पर करते थे रैकी

वन विभाग द्वारा पकड़े गए आरोपियों से की गई शुरुआती पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका एक संगठित गिरोह है जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न पुराने किलों, मकबरों, गढ़ी और ऐतिहासिक खंडहरों को चिन्हित कर गड़ा धन खोजने का काम करता है। गिरफ्तार किए गए 4 आरोपियों में से एक स्थानीय टपरियन गांव का निवासी है, जो इलाके में रेकी और रास्ता दिखाने का काम कर रहा था, जबकि बाकी 3 आरोपी उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रहने वाले हैं।


वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज, फरार 4 आरोपियों की तलाश जारी

वन विभाग की टीम ने मौके से मेटल डिटेक्टर मशीन, फावड़े, गैंती सहित उत्खनन में प्रयुक्त सभी उपकरण जब्त कर लिए हैं। गिरफ्तार चारों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। वहीं मौके से फरार हुए शेष 4 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।