दमोह, राजेन्द्र तिवारी। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े नौरादेही अभ्यारण्य (अब रानी दुर्गावती अभ्यारण्य) में विस्थापन प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा ब्लॉक के उन्हाड़ीखेड़ा गांव के दो दर्जन से अधिक ग्रामीण मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।


ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के 150 से ज्यादा परिवार विस्थापन के पात्र हैं, लेकिन अधिकारियों से कथित सांठगांठ न करने पर उन्हें अपात्र करार दिया गया। पहले की जांच में विस्थापित गांवों में कूटरचित दिव्यांग प्रमाण पत्रों के जरिए अपात्र लोगों द्वारा मुआवजा हड़पने के प्रयास सामने आए थे। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर के आदेश पर खंड स्तरीय समिति ने दोबारा पात्र-अपात्र सूची तैयार की, जिसमें गांव छोड़ चुके लोगों को अपात्र माना गया।


अब ग्रामीणों का कहना है कि 150 से ज्यादा परिवार दिन-रात जंगली जानवरों के बीच रह रहे हैं। किसी दिन अनहोनी हो गई तो जिम्मेदार कौन होगा? उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि या तो शासन उन्हें उचित मुआवजा देकर विस्थापित करे, या फिर किसी दूसरी जगह कृषि भूमि उपलब्ध कराए, जहां रहकर वे अपना जीवनयापन कर सकें।