पन्ना/गुनौर, जीतेन्द्र रजक। घर-घर साफ पानी पहुंचाने का सपना लेकर शुरू हुई नल-जल योजना महज कागजी शोपीस बनकर रह गई है। जनपद पंचायत गुनौर की ग्राम पंचायत बन्धौरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पथरहा में इन दिनों पेयजल संकट चरम पर है। योजना के बावजूद ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए रोजाना 1-2 किलोमीटर दूर नदी से पानी लाना पड़ रहा है, जबकि कई परिवार गंदा कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं।

योजना पर खर्च, लेकिन नल सूखे

ग्रामीणों का आरोप है कि नल-जल योजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए। गांव में नल और पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन पानी की सप्लाई शून्य है। नतीजा यह है कि महिलाओं और बच्चों को सुबह से ही पानी की तलाश में घर से निकलना पड़ता है। गर्मी के मौसम में समस्या और भी भयावह हो जाती है।

नदी से पानी ढोने की मजबूरी

कई परिवार रोजाना एक से दो किलोमीटर दूर नदी तक जाकर पानी भरकर लाते हैं। जिनके पास नदी तक पहुंचने की सुविधा नहीं है, वे गांव के पुराने कुओं पर निर्भर हैं। ग्रामीण बताते हैं कि कई कुओं का पानी साफ नहीं है और लंबे समय से सफाई न होने के कारण गंदगी जमा है। फिर भी मजबूरी में इसी पानी का इस्तेमाल पीने और घरेलू कामों के लिए करना पड़ रहा है।

जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना से उन्हें उम्मीद थी कि महिलाओं को दूर-दराज से पानी ढोने की परेशानी से निजात मिलेगी। लेकिन लापरवाही के चलते यह उम्मीद धरी की धरी रह गई। उन्होंने संबंधित विभाग और पंचायत के अधिकारियों से मांग की है कि योजना की मौके पर जांच कराई जाए, बंद पड़ी व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए और नियमित स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

सवाल यही है— जब योजना बनी तो पानी क्यों नहीं?

पथरहा के ग्रामीणों की समस्या ने नल-जल योजना के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जब लोग आज भी नदी और गंदे कुएं के पानी पर निर्भर हैं, तो योजना का असली फायदा किसे मिल रहा है? ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि जमीनी हकीकत की जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। उन्हें कागजी योजना नहीं, बल्कि नल से वास्तव में बहता पानी चाहिए।