भोपाल। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने अस्पताल परिसर में ही उन्हें रोक दिया। परिसर के चारों ओर भारी बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए गए हैं। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल, रिजर्व फोर्स, एसडीएम और वाटर कैनन की गाड़ियां तैनात की गई हैं।


14 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये स्टाइपेंड करने की मांग

वर्तमान में मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को ₹14,337 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है, जिसे वे बढ़ाकर न्यूनतम ₹30,000 प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि डेढ़ महीने पहले सरकार ने स्टाइपेंड बढ़ाने का मौखिक आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं हुआ। डॉक्टरों का साफ कहना है— "अब आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहिए।"


'UP में स्टाइपेंड 25 हजार हुआ, तो MP में क्यों नहीं?'

प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा ने बताया कि उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा था कि अगर उत्तर प्रदेश स्टाइपेंड बढ़ाता है तो मध्य प्रदेश में भी वृद्धि होगी। अब उत्तर प्रदेश में इसे बढ़ाकर ₹25,000 करने का आदेश जारी हो चुका है, इसलिए मध्य प्रदेश सरकार को भी अपना वादा निभाना चाहिए।


उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 2,000 शासकीय और कुल 3,600 इंटर्न डॉक्टर हैं। भावी डॉक्टरों को मिलाकर यह संख्या 15 हजार तक पहुंचती है। डॉक्टरों ने दावा किया कि आंदोलन में शामिल होने आ रहे सागर के इंटर्न डॉक्टरों की बस को नादरा बस स्टैंड पर रोक दिया गया।


इमरजेंसी गेट भी ब्लॉक, अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे डॉक्टर

मार्च निकालने की कोशिश के दौरान पुलिस ने अस्पताल के इमरजेंसी गेट समेत सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक था, लेकिन प्रशासन ने उनके आगे पुलिस खड़ी कर दी। डॉक्टरों ने ऐलान किया है कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं आकर या शासन स्तर पर स्टाइपेंड वृद्धि का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक वे हमीदिया परिसर में ही धरने पर डटे रहेंगे।