नई दिल्ली। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुए खतरनाक धमाके में 30 से ज्यादा लोग मारे गए और 160 घायल हुए हैं। आतंक के पनाहगार पाकिस्तान ने 24 घंटे के अंदर अफगानिस्तान और भारत को इस धमाके का जिम्मेदार ठहरा दिया।
सदियों से आतंक को पोषित करने वाला पाकिस्तान इस धमाके के लिए अपने इंटेलिजेंस फैक्टर और इस बात को दोष नहीं देता कि उसने लंबे समय तक आतंकी समूहों को पाला-पोसा है, जो अब उसके खिलाफ हो गए हैं।
भारतीय एजेंसियों के एक असेसमेंट से पता चला कि यह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) या इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) का काम हो सकता है। हालांकि, दोनों समूहों ने अब तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
भारतीय एजेंसियां इस बात से भी इनकार नहीं करती हैं कि यह हमला बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों को हुए नुकसान से ध्यान हटाने के लिए सरकार की तरकीब हो सकती है।
बता दें, इस्लामाबाद के तरलाई कलां इलाके में खाद्जा तुल कुबरा मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के दौरान आतंकी हमला हुआ। कहा जा रहा है कि हमले में शियाओं को निशाना बनाया गया। हमले के पैटर्न से अनुमान लगाया जा रहा है कि यह टीटीपी या आईएसकेपी का काम हो सकता है।
भारतीय अधिकारियों ने सवाल पूछा है कि पाकिस्तान ने भारत और अफगानिस्तान पर इतनी जल्दी आरोप क्यों लगाया। अधिकारी ने कहा कि वे इंटेलिजेंस की नाकामी के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, और यह समझना होगा कि यह चूक जानबूझकर की गई थी या नहीं।
पाकिस्तानी सरकार के सही मायने में प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर हैं। पाकिस्तानी सरकार हाल के महीनों में कई मौकों पर शर्मिंदा हुई है। इसकी शुरुआत भारत के ऑपरेशन सिंदूर से हुई थी और तब से पाकिस्तान कई मोर्चों पर लड़ाई में है।
ताजा हालात के अनुसार पाकिस्तान, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए), टीटीपी और अफगान तालिबान से भी लड़ रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि यह इलाका बहुत जल्द धमाके के लिए तैयार है।
आईएसकेपी की पाकिस्तानी सरकार के साथ लंबे समय से तानातनी चल रही है। टीटीपी की तरह आईएसकेपी भी चाहता है कि देश पर शरिया कानून के तहत राज हो। आईएसआई ने कुछ समय के लिए आईएसकेपी को लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर अफगान तालिबान और टीटीपी के खिलाफ लड़ने के लिए शामिल किया था, लेकिन एक अधिकारी ने कहा कि यह रणनीति आईएसआई के सामने नाकाम हो गई क्योंकि आईएसकेपी ने एक बार फिर दिखा दिया है कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
दरअसल, आईएसकेपी अफगान तालिबान से अपनी दुश्मनी की वजह से कुछ समय के लिए लश्कर-ए-तैयबा के साथ लड़ने के लिए राजी हो गया था। उसे उम्मीद थी कि पाकिस्तान अफगान तालिबान के खिलाफ लड़ाई में उसकी मदद करेगा, लेकिन आईएसआई अपने वादे से मुकर गया।
इसके अलावा, इस्लामिक देशों के सभी लोग, खास तौर पर सीरिया और इराक के लोग, पाकिस्तान के साथ कोई गठबंधन नहीं चाहते थे। आईएसकेपी मुद्दे उठा रहा था कि पाकिस्तान शरिया से चलने वाला इस्लामिक स्टेट बन रहा है, जिसकी वजह से आईएसआई और आईएसकेपी का अलायंस कमजोर पड़ रहा था।
एक अधिकारी ने कहा कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि हमला आईएसकेपी ने किया था। हालांकि, अधिकारी ने कहा कि इस पर आईएसकेपी के शामिल होने के संकेत भी हैं।
शुरुआती जांच शुरू होने से पहले ही पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हमले के लिए अफगान तालिबान और भारत को जिम्मेदार ठहराया। विश्लेषक ने कहा कि मुनीर ने बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया दी है। इससे साफ पता चलता है कि वह कई मुद्दों से ध्यान हटाना चाहता है। उन्होंने बलूचिस्तान मुद्दे को भटकाने की कोशिश की और भारत और तालिबान के खिलाफ एक नैरेटिव बनाने की कोशिश की। ऐसा बयान और हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान भारत के खिलाफ एक बड़ा नैरेटिव बना रहा है।
इसने जैश-ए-मोहम्मद को कट्टरपंथी रैलियां करने की इजाजत दी है, साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लोगों को भड़काने की भी कोशिश की है। विशेषज्ञों का कहना है कि उनका मकसद अशांति फैलाना और फिर उसके लिए भारत को दोषी ठहराना है। ऐसा करते हुए पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा का अंदाजा लगाना भूल गया और शहरी इलाके में हुआ धमाका इसका सबूत है।
पाकिस्तान धमाके में आईएसकेपी एंगल, सरकार ने इंटेलिजेंस की चूक को नजरअंदाज कर भारत पर साधा निशाना
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Saurabh Shukla
23 सितंबर 2026, 12:48 am IST
Saurabh Shukla23 सितंबर 2026, 12:48 am IST
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