भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की झमाझम बारिश के दौर के बीच मौसम विभाग ने एक नया पूर्वानुमान जारी किया है। राज्य में अगले 72 घंटों (दो से तीन दिन) के दौरान बारिश की गतिविधियों में थोड़ी कमी देखने को मिलेगी। हालांकि, किसानों और आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि यह स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाली है। 14 जुलाई से बंगाल की खाड़ी में बनने वाली एक नई मौसम प्रणाली (वेदर सिस्टम) के चलते प्रदेश में मानसून का अगला दौर फिर से सक्रिय हो जाएगा।
छतरपुर के गौरीहार में 182 मिमी अति भारी वर्षा, सामान्य से 8% अधिक बरसा पानी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, मध्य प्रदेश में चालू मानसून सीजन की शुरुआत बेहद शानदार रही है। 1 जून से लेकर अब तक की स्थिति को देखें तो राज्य में सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में मानसून का सबसे रौद्र और खूबसूरत रूप देखने को मिला है। विशेष रूप से छतरपुर जिले के गौरीहार में रिकॉर्ड 182 मिमी (करीब 7 इंच) अति भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा विंध्य और बुंदेलखंड के कई अन्य जिलों में भी मूसलाधार बारिश हुई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल मानसून का मुख्य केंद्र पूर्वी मध्य प्रदेश बना हुआ है।
यूपी का लो प्रेशर एरिया हुआ कमजोर, नहीं होगी 'ब्रेक मानसून' जैसी स्थिति
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के उत्तर-मध्य भाग के ऊपर सक्रिय निम्न दाब का क्षेत्र (Low Pressure Area) अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। इसके साथ ही मानसून द्रोणिका (मानसून ट्रफ) भी अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर उत्तर दिशा की ओर बढ़ गई है। इन्हीं दो भौगोलिक कारणों से अगले दो-तीन दिनों तक मध्य भारत और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की तीव्रता और रफ्तार में गिरावट आएगी। हालांकि, विशेषज्ञों ने साफ किया है कि इस स्थिति को 'ब्रेक मानसून' (बारिश पर पूरी तरह ब्रेक लगना) नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह केवल कुछ समय का ठहराव है जो बंगाल की खाड़ी में उठने वाले नए सिस्टम के आने से पहले का सन्नाटा है।
13 जुलाई को बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती घेरा, इन जिलों में फिर शुरू होगी भारी आंधी-बारिश
मौसम विज्ञानियों के पूर्वानुमान के मुताबिक, 13 जुलाई के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक नया ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण (Upper Air Cyclonic Circulation) आकार लेने जा रहा है। यदि समुद्र की सतह का तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो यह चक्रवाती घेरा मजबूत होकर 'निम्न दाब क्षेत्र' (Low Pressure Area) में तब्दील हो जाएगा। इस सिस्टम का सीधा और सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों पर देखने को मिलेगा। इसके प्रभाव से 14 जुलाई से निम्नलिखित जिलों में मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है:
- विंध्य और शहडोल संभाग: रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।
- महाकौशल और बुंदेलखंड क्षेत्र: पन्ना, छतरपुर, कटनी, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट और जबलपुर।
- इसके विपरीत, पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों (जैसे इंदौर, उज्जैन, भोपाल संभाग) में, जहां हाल ही के दिनों में सामान्य से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है, वहां बारिश की तीव्रता में थोड़ी राहत बनी रहेगी।
खरीफ फसलों के लिए अमृत साबित होगी जुलाई की बारिश, नदी-तालाबों का सुधरेगा जलस्तर
मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र नायक का कहना है कि कृषि और किसानों के लिहाज से जुलाई महीने का दूसरा पखवाड़ा (उत्तरार्ध) बेहद क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। बंगाल की खाड़ी से आने वाले नए सिस्टम के कारण होने वाली व्यापक वर्षा खरीफ की प्रमुख फसलों जैसे सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द और तुअर (अरहर) के पौधों के विकास के लिए अमृत का काम करेगी। इस बारिश से न केवल प्रदेश के बड़े बांधों (डैमों), तालाबों और सदानीरा नदियों के जलस्तर में तेजी से सुधार होगा, बल्कि लगातार गिरता जा रहा भूजल स्तर (Groundwater Level) भी रिचार्ज हो सकेगा। हालांकि, मौसम विभाग ने चेतावनी भी जारी की है कि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के चलते जलभराव (वाटर लॉगिंग), नदी-नालों में उफान और आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) गिरने जैसी अप्रिय स्थितियां भी बन सकती हैं। इसके लिए आम नागरिकों और विशेषकर किसानों को मौसम विभाग के दैनिक बुलेटिन और चेतावनियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


