भिंड। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई (रविवार) को भिंड जिले के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री प्रदेश की करोड़ों लाड़ली बहनों के खाते में योजना की 38वीं किस्त की राशि ट्रांसफर करेंगे। इस बार लाड़ली बहना योजना की राशि भेजने और महिलाओं के साथ सीधे संवाद का यह मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम भिंड जिले की लहार तहसील में आयोजित किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के संपन्न होने के बाद, मुख्यमंत्री लहार के स्थानीय भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा 'गुड्डू' के निवास स्थान पर भी जाएंगे, जहां वे विधायक के परिवार में हुए मातृ शोक पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करेंगे।


बारिश की आशंका के चलते बदला गया वेन्यू, अब लहार में होगा 2 घंटे का मुख्य कार्यक्रम

लाड़ली बहना योजना के इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन पहले भिंड के ही मेहगांव स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में होना सुनिश्चित किया गया था। लेकिन गुरुवार को प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश शुक्ला, कलेक्टर किरोड़ीलाल मीना सहित जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जब मेहगांव मंडी परिसर का बारीकी से जायजा लिया, तो आगामी दिनों में होने वाली भारी बारिश की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से कार्यक्रम स्थल को बदलने का निर्णय लिया गया। अब यह कार्यक्रम लहार में आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर 1:00 बजे से लेकर दोपहर 3:00 बजे तक करीब दो घंटे रुकेंगे। मुख्यमंत्री के आगमन और गरिमापूर्ण आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी सभी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं, वहीं विधायक अम्बरीश शर्मा ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


प्रदेश की महिलाओं के लिए नई सौगात: शुरू हुई 'लखपति गोपालक दीदी योजना'

इस कार्यक्रम के माध्यम से मोहन सरकार प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने के लिए एक नई कल्याणकारी योजना 'लखपति गोपालक दीदी योजना' की सौगात देने जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को दुग्ध उत्पादन से जोड़कर लखपति बनाना है।


  • मुफ्त में तैयार होंगे उच्च नस्ल के मवेशी: इस योजना के तहत महिलाओं को अलग से बजट देकर सीधे मवेशी नहीं खरीदने होंगे, बल्कि उनके घरों में पहले से मौजूद कम दूध देने वाली 'गैर-नस्लीय' (देशी) गायों और भैंसों की पहचान की जाएगी।
  • वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग: पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) तकनीक के माध्यम से इन मवेशियों का उच्च नस्ल के सीमन से गर्भाधान कराया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप उच्च नस्ल की बछिया और पड़िया का जन्म होगा, जो आगे चलकर बेहतरीन दुधारू मवेशी बनेंगे।
  • 3 से 4 लाख की अतिरिक्त सालाना आय: सरकार का अनुमान है कि इस वैज्ञानिक नस्ल सुधार के जरिए जब महिलाओं के घरों में उच्च नस्ल के दुधारू पशु तैयार होंगे, तो दूध उत्पादन में भारी वृद्धि होगी। इससे पशुपालक महिलाओं को सालाना 3 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त होगी।


कैसे मिलेगा इस नई योजना का लाभ? प्रशासनिक गाइडलाइन जारी

पशुपालन विभाग ने 'लखपति गोपालक दीदी योजना' को धरातल पर उतारने और इसका सीधा लाभ हितग्राहियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए एक कड़ा प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:


  • कृत्रिम गर्भाधान पर फोकस: सरकार का पूरा ध्यान अब गांवों में मौजूद कम दूध देने वाले मवेशियों के कृत्रिम गर्भाधान पर रहेगा, जिसके लिए सभी विकासखंडों (ब्लॉक्स) को निश्चित लक्ष्य दे दिए गए हैं।
  • विशेष पहचान अभियान और प्रशिक्षण: ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-नस्लीय मवेशियों को चिन्हित करने के लिए एक व्यापक पहचान अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही इस तकनीक से जुड़े अमले के लिए प्रशिक्षण सत्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
  • लापरवाह मैदानी अमले पर होगी कार्रवाई: जो मैदानी कर्मचारी या गौ-सेवक इस काम में रुचि नहीं लेंगे, उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाएगा और उनकी कृत्रिम गर्भाधान किट वापस जब्त कर ली जाएगी।
  • हर पंचायत में 'मैत्री कार्यकर्ता' और मासिक समीक्षा: योजना की सुचारू मॉनिटरिंग के लिए विकासखंड स्तर पर 'दक्षता मूल्यांकन समिति' बनाई जाएगी जो हर महीने काम की समीक्षा करेगी। इसके अलावा, राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक 'मैत्री कार्यकर्ता' की तैनाती अनिवार्य रूप से की जाएगी।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक मॉडल

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने इस योजना के दूरगामी परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 'लखपति गोपालक दीदी योजना' को महज एक सामान्य डेयरी विकास कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वास्तव में, यह मध्य प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) की पूरी तस्वीर को बदलने वाला एक बेहद वैज्ञानिक, सटीक और व्यावहारिक मॉडल साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस योजना को पूरी गंभीरता से लागू करने के लिए जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं, और वे स्वयं इसकी हर महीने प्रोग्रेस रिपोर्ट की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करेंगे। यह योजना आने वाले समय में महिलाओं को पूरी तरह से आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।