सोल, 28 मई । बलूच नेशनल मूवमेंट ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित चागाई जिले में 1998 में किए गए परमाणु परीक्षणों की 28वीं बरसी पर दुनिया के कई देशों में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और जागरूकता अभियान चलाए। रिपोर्ट के अनुसार, इसी अभियान के तहत दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में भी एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया गया, जहां परमाणु परीक्षणों के पर्यावरणीय और मानवीय प्रभावों को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।
संगठन ने प्रदर्शनकारियों को अंग्रेजी और कोरियाई भाषा में संबोधित किया। उन्होंने चागाई क्षेत्र में कथित रूप से लंबे समय से झेली जा रही स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्याओं पर प्रकाश डाला। प्रतिभागियों ने परमाणु परीक्षणों से प्रभावित समुदायों के लिए न्याय, पर्यावरणीय पुनर्वास और जवाबदेही की मांग की।
उन्होंने कहा, "अभियान के तहत ब्रिटेन के लंदन, मैनचेस्टर और कैंब्रिज सहित कई शहरों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में पर्चे बांटकर यह संदेश दिया गया कि 1998 में किए गए परमाणु परीक्षणों का स्थानीय आबादी पर दीर्घकालिक असर पड़ा है। लोगों ने इसके खिलाफ नारे भी लगाए।"
बलूच नेशनल मूवमेंट ने दावा किया कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति के इस क्षेत्र का उपयोग परमाणु परीक्षणों के लिए किया गया, जिसके कारण वहां पर्यावरणीय नुकसान और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ीं।
संगठन ने कहा कि अभियान का मकसद बलूचिस्तान में हो रहे परमाणु परीक्षण की ओर दुनिया का ध्यान दिलाना था और उनसे मानवाधिकार की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने की अपील करना था।
इस बीच, बलूच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे बलूचिस्तान के इतिहास का “काला दिन” बताया। लिखा, " पाकिस्तान के हुक्मरानों ने बलूचिस्तान में एक परमाणु विस्फोट किया। घटना के बाद क्षेत्र में व्यापक नुकसान हुआ। एक तिहाई आबादी मानसिक रूप से अस्वस्थ है। यही कारण है कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहना चाहते हैं कि पाकिस्तान एक खतरनाक और आतंकी देश है इसलिए इस देश को परमाणु हथियार संपन्न न रहने दिया जाए। "

