नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।25 अगस्त 2026 (मंगलवार) को श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 6:21 बजे तक रहेगी; इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन सावन मास का अंतिम भौम प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत का अद्भुत संयोग है। भगवान शिव और माता पार्वती (मंगला गौरी) की पूजा करना अत्यंत फलदायी रहेगा। कर्ज, आर्थिक समस्याओं से मुक्ति और लंबी आयु के लिए भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा करना चाहिए।
मंगलवार सुबह 6:10 बजे सूर्योदय और शाम 6:47 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 5:09 बजे चंद्रोदय और अगले दिन तड़के 4:12 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 25 अगस्त 2026 को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा देर रात तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा।
मंगलवार को हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि सुबह लगभग 7:39 से 7:41 बजे तक आयुष्मान योग प्रभावी रहेगा, इसके बाद सौभाग्य योग लग जाएगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:03 से 12:54 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल दोपहर 3:48 से शाम 5:33 बजे तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल दोपहर 3:38 बजे से 5:12 बजे और गुलिक काल दोपहर 12:28 से 2:03 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल सुबह 9:19 से 10:54 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
मंगलवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा। उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।




