मुंबई। सोनू निगम भारतीय संगीत की दुनिया के उन चुनिंदा गायकों में शामिल हैं, जिन्होंने हिंदी के साथ-साथ देश की कई दूसरी भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। अलग-अलग भाषाओं में गाते समय सिर्फ शब्दों को सही बोलना ही काफी नहीं होता, बल्कि उस भाषा के उच्चारण, लहजे और बोलने के तरीके को भी सही ढंग से पकड़ना पड़ता है। खासकर दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाते समय हिंदी भाषी गायकों के लिए यह चुनौती और बढ़ जाती है। ऐसे में सोनू निगम ने बताया है कि वह किसी कम परिचित भाषा में गाना गाते समय किन बातों का ध्यान रखते हैं और खुद को उस भाषा के अंदाज में कैसे ढालते हैं।

आईएएनएस ने इंटरव्यू में जब सोनू निगम से पूछा, "आपने कई भाषाओं में गाने गाए हैं और हर भाषा की अपनी अलग बारीकियां होती हैं। ऐसे में एक गायक के लिए इन बारीकियों को समझना कितना आसान या मुश्किल होता है, और आप गाते समय इनका सही इस्तेमाल कैसे करते हैं?"

इस सवाल पर सोन निगम ने कहा, ''इसका जवाब कई स्तरों पर दिया जा सकता है। सबसे पहली चीज गायक की क्षमता है कि वह किसी भाषा और उसके गायन के अंदाज को कितनी अच्छी तरह अपने अंदर उतार सकता है। किसी दूसरी भाषा में गाते समय गायक को सिर्फ शब्द याद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि उस भाषा के स्वाभाविक अंदाज को भी समझना जरूरी है। तभी गाना सुनने वाले को यह महसूस होता है कि उसे उसी भाषा के जानकार गायक ने गाया है।''

सोनू निगम ने अपने शुरुआती अनुभव को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाना शुरू किया था, तब वह महान गायक एस. पी. बालासुब्रमण्यम को ध्यान में रखते थे। उन्होंने कहा, "जब मैंने पहली बार दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाने गाए, तो मेरे दिमाग में एस. पी. बालासुब्रमण्यम होते थे। बालासुब्रमण्यम ने अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गाना गाया। उनके उच्चारण और गायकी में भाषा की स्वाभाविकता साफ सुनाई देती थी। मेरे लिए, उनकी शैली को ध्यान में रखना अपनी आवाज को उस भाषा के करीब ले जाने का एक तरीका था।"

सोनू निगम ने आगे कहा, ''जब कोई गायक ऐसी भाषा में गाना गा रहा हो, जिसे वह पूरी तरह नहीं जानता, तो उसे उस व्यक्ति की मदद भी लेनी पड़ती है, जो उसे गीत सिखा रहा है। यहां उस व्यक्ति की भूमिका काफी अहम हो जाती है, क्योंकि वही गायक को शब्दों के सही उच्चारण और भाषा के अंदाज के बारे में समझाता है। भाषा सीखने की प्रक्रिया में दोनों तरफ से मेहनत जरूरी है। एक तरफ गायक को खुद शब्दों, उच्चारण और शैली को समझने की कोशिश करनी होती है, वहीं दूसरी तरफ उसे सही जानकारी देने वाला व्यक्ति भी चाहिए। अगर गाना सिखाने वाला व्यक्ति ही भाषा के उच्चारण को लेकर स्पष्ट नहीं है, तो गायक पूरी मेहनत करने के बावजूद गलती कर सकता है।''

बता दें कि सोनू निगम इन दिनों अपने नए हरियाणवी गाने 'चुन्नी' को लेकर काफी चर्चा में हैं। गाने में सोनू निगम के साथ लोकप्रिय हरियाणवी गायिका रेणुका पंवार ने भी अपनी आवाज दी है।